तनाव प्रबंधन, परीक्षा की चिंता और भावनात्मक संतुलन पर हुई चर्चा, सहयोगी संस्थाओं को प्रमाणपत्र एवं मोमेंटो देकर किया गया सम्मानित…
सूरजपुर, 16 अक्टूबर 2026:– मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा जरूरतमंद लोगों को समय पर उपचार और परामर्श उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित ‘मन जागृति अभियान’ के तहत जिला चिकित्सालय सूरजपुर के सभाकक्ष में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम एवं सहयोगी संस्था सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, समय पर उपचार तथा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।
कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, चिकित्सा विशेषज्ञों, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित मरीजों एवं उनके परिजनों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जानकारी देना ही नहीं, बल्कि लोगों को अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करने और आवश्यकता पड़ने पर बिना किसी संकोच के सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना भी रहा।
मानसिक स्वास्थ्य को समझना और समय पर सहायता लेना जरूरी
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह, सिविल सर्जन डॉ. अजय मार्कम, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश पैकरा तथा मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने, उपलब्ध उपचार एवं सहायता सेवाओं का लाभ उठाने तथा मानसिक बीमारियों को लेकर समाज में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। तनाव, चिंता और भावनात्मक परेशानियों को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें समझना और आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों से परामर्श लेना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर तथा प्रभावित व्यक्तियों को उचित सहयोग देकर उनके जीवन में बेहतर बदलाव लाने में मदद की जा सकती है।

सेना से लेकर जेल और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचा जागरूकता अभियान…
‘मन जागृति अभियान’ के अंतर्गत जिले के विभिन्न संस्थानों एवं समुदायों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें 10वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, जिला जेल सूरजपुर, विभिन्न महाविद्यालयों के बालक एवं बालिका छात्रावास, वृद्धाश्रम, अरुणोदय कोचिंग संस्थान, संगवारी तथा मितानिन कार्यक्रम सहित अन्य शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं को शामिल किया गया।
इन जागरूकता सत्रों के माध्यम से लोगों को तनाव के कारणों को पहचानने, परीक्षा संबंधी चिंता से निपटने, भावनाओं को संतुलित रखने, आत्मविश्वास बढ़ाने तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के दौरान समय पर सहायता प्राप्त करने के बारे में जानकारी दी गई। विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर जागरूकता फैलाने की इस पहल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवाद को सहज बनाना और लोगों को अपनी परेशानियों के समाधान के लिए उचित मार्ग अपनाने के प्रति प्रेरित करना रहा।
विशेष रूप से विद्यार्थियों में परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव और चिंता को समझने, युवाओं में आत्मविश्वास विकसित करने तथा अन्य वर्गों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ाने की दिशा में जागरूकता गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया गया।
जागरूकता सत्रों से लोगों में बढ़ी समझ, संस्थाओं ने साझा किए अनुभव….
सम्मान समारोह के दौरान 10वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, जिला जेल सूरजपुर एवं अरुणोदय कोचिंग संस्थान के प्रतिनिधियों ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। प्रतिनिधियों ने बताया कि ऐसे सत्रों से प्रतिभागियों को तनाव के कारणों को समझने, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर बेझिझक चर्चा करने तथा अपनी भावनाओं को बेहतर ढंग से संभालने की जानकारी मिलती है।
उन्होंने यह भी बताया कि जागरूकता कार्यक्रम लोगों को आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समझ विकसित करने और समस्याओं को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से उपचार प्राप्त कर रहे मरीजों एवं उनके परिजनों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि नियमित परामर्श, उचित उपचार, स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग तथा परिवार के सकारात्मक व्यवहार से उन्हें अपनी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और दैनिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायता मिली।
मरीजों एवं उनके परिजनों के अनुभवों ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान में समय पर उपचार, निरंतर सहयोग और परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। इस अवसर पर समाज के सभी वर्गों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और सहयोग का व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया।
सहयोगी संस्थाओं को प्रमाणपत्र एवं मोमेंटो देकर किया सम्मानित….
कार्यक्रम के दौरान ‘मन जागृति अभियान’ के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों के आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाली संस्थाओं एवं उनके प्रतिनिधियों को प्रमाणपत्र और मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने में सहयोगी संस्थाओं के योगदान को प्रोत्साहित करना और भविष्य में भी इस तरह की गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना रहा।
इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं एवं स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न गतिविधियों पर प्रस्तुति के माध्यम से जानकारी साझा की गई। उपस्थित प्रतिनिधियों से अपील की गई कि वे अपने-अपने संस्थानों और समुदायों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा जरूरतमंद लोगों को उचित परामर्श एवं उपचार सेवाओं तक पहुंचने के लिए प्रेरित करें।
संवेदनशील समाज के निर्माण में सामूहिक सहभागिता जरूरी…
‘मन जागृति अभियान’ के तहत आयोजित यह कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, उपचार एवं परामर्श सेवाओं की जानकारी जनसामान्य तक पहुंचाने और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने या प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव करने के बजाय उन्हें समझना, सम्मान देना और जरूरत के समय उचित सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग एवं सहयोगी संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और समाज में जागरूकता का दायरा बढ़ाने की दिशा में पहल की गई। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि परिवार, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और स्वास्थ्य सेवाएं मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करें, जहां प्रत्येक व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात कर सके और जरूरत पड़ने पर समय पर उचित सहायता प्राप्त कर सके।


