सरपंच के निजी खाते में पंचायत की राशि जाने का दावा, सरपंच-सचिव सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
पत्थलगांव/जशपुर:–जशपुर जिले के जनपद पंचायत पत्थलगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत केराकछार में पंचायत की वित्तीय व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने पंचायत की विकास योजनाओं और सरकारी मदों की राशि के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए वर्ष 2020 से अब तक के समस्त वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस मामले में सरपंच, सचिव और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत में 15वें वित्त आयोग, मनरेगा सहित विभिन्न विकास योजनाओं के तहत प्राप्त राशि के उपयोग में कथित अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है कि कुछ कार्यों में कागजों पर व्यय दर्शाकर राशि के हस्तांतरण में नियमों की अनदेखी की गई। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता और वित्तीय नुकसान की पुष्टि आधिकारिक जांच एवं दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
सरपंच के निजी खाते में राशि जाने के आरोप से बढ़ा विवाद
मामले का सबसे गंभीर पहलू सरपंच जयमुनि टोप्पो के निजी बैंक खाते में पंचायत की राशि जाने का आरोप है। ग्रामीणों ने सरपंच के पति महेश टोप्पो, जो सरपंच प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते बताए जा रहे हैं, तथा पंचायत सचिव दिनेश नाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पंचायत के सरकारी धन के भुगतान और निकासी की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। यदि पंचायत की राशि वास्तव में बिना उचित वैधानिक आधार के निजी खाते में हस्तांतरित की गई है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। ऐसे में संबंधित बैंक खातों, भुगतान आदेशों, बिल-वाउचर, कार्यों के अभिलेखों और सरकारी पोर्टलों पर दर्ज विवरणों का मिलान आवश्यक है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में संबंधित विभागों के समक्ष कई बार लिखित शिकायतें प्रस्तुत की गईं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई सामने नहीं आई है। शिकायतकर्ताओं ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए आशंका जताई है कि प्रभावशाली लोगों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
ग्रामीणों ने क्षेत्र के पूर्व विधायक तथा जांच से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता अथवा मिलीभगत की पुष्टि स्वतंत्र जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर प्रशासन से गुहार
ग्राम पंचायत केराकछार के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर जशपुर से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं—
- वर्ष 2020 से अब तक का विशेष वित्तीय ऑडिट: पंचायत के सभी बैंक खातों, वित्तीय अभिलेखों, भुगतान आदेशों, बिल-वाउचर और विकास कार्यों की जांच कराई जाए।
- कथित अनियमित भुगतान की जांच और वसूली: यदि जांच में सरकारी राशि का अवैध हस्तांतरण या गबन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार राशि की वसूली की जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
- जांच प्रक्रिया की जवाबदेही तय हो: शिकायतों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए लापरवाही या मिलीभगत प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
ग्राम पंचायत केराकछार से जुड़े इन आरोपों ने पंचायत के वित्तीय प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और वित्तीय अभिलेखों की जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए क्या कदम उठाता है।
ग्रामीणों की मांग है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक भुगतान, निर्माण कार्य और बैंक लेन-देन का भौतिक एवं दस्तावेजी सत्यापन किया जाए, ताकि यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।


