अम्बिकापुर/सूरजपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के सूरजपुर संभाग में करीब 1 करोड़ 98 लाख रुपये की निविदाओं को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता ने निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, विभागीय गोपनीय SAP सिस्टम के अनधिकृत संचालन तथा जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं किए जाने के आरोप लगाए हैं। मामले में उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
निविदा क्रमांक 70 से 145 तक प्रक्रिया पर सवाल….
शिकायत के अनुसार सूरजपुर संभाग के कार्यपालन यंत्री कार्यालय में निविदा क्रमांक 70 से 145 तक की निविदाओं को विभागीय SAP सिस्टम की आधिकारिक व्यवस्था में अपलोड नहीं किया गया। साथ ही नोटिस बोर्ड अथवा समाचार पत्रों में भी इनके प्रकाशन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि करीब ₹1.98 करोड़ के कार्य चहेते ठेकेदारों को बांटे गए, जिससे पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
संविदा लाइनमैन द्वारा SAP संचालन का आरोप….
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नियमानुसार निविदा फॉर्म और NIT अपलोड करने के लिए अधिकृत अधिकारी के स्थान पर संविदा लाइनमैन संदीप टोप्पो पिछले सात वर्षों से अधिक समय से विभाग के गोपनीय SAP कंप्यूटर सिस्टम का संचालन कर रहे थे। शिकायतकर्ता ने इसे विभागीय गोपनीयता और वित्तीय प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए जांच की मांग की है।
इसी तरह कार्यालय के वर्क सेक्शन का कार्य संविदा लाइनमैन सियाराम साहू द्वारा किए जाने का भी आरोप है, जबकि उनकी मूल पदस्थापना कनिष्ठ यंत्री (ग्रामीण), करंजी में बताई गई है। शिकायतकर्ता ने इस व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है।

जांच समिति बनी, लेकिन अब तक रिपोर्ट का इंतजार…..
शिकायत के बाद मुख्य अभियंता, अम्बिकापुर द्वारा 9 जून 2026 को जांच समिति गठित किए जाने की बात सामने आई है। समिति को 15 दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने का दावा शिकायतकर्ता ने किया है। हालांकि, शिकायत के अनुसार कई सप्ताह बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संविदा लाइनमैन संदीप टोप्पो के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनका स्थानांतरण अम्बिकापुर स्थित उनके गृह क्षेत्र में कर दिया गया। वहीं सहायक अभियंता बी.एस. मरकाम, जो सूरजपुर उप संभाग में पदस्थ बताए जा रहे हैं, उनके खिलाफ भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
RTI वापस लेने के लिए दबाव का आरोप……
मामले में शिकायतकर्ता ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उसके अनुसार, अतिरिक्त मुख्य अभियंता की ओर से फोन कर RTI आवेदन वापस लेने के लिए कहा गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि यह आरोप सही है तो यह जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
MD कार्यालय में 25 वर्षों से एक ही कर्मचारी की पदस्थापना पर भी सवाल…..
शिकायतकर्ता ने विभाग की स्थानांतरण नीति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि जब प्रबंध निदेशक कार्यालय में ही एक चपरासी की करीब 25 वर्षों से लगातार पदस्थापना को लेकर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो मैदानी कार्यालयों में स्थानांतरण नीति के पालन की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस संबंध में प्रबंध निदेशक से दूरभाष पर संपर्क किए जाने पर उन्होंने मुख्य अभियंता, अम्बिकापुर से बात करने की बात कही, ऐसा शिकायतकर्ता का कहना है।
अब निगाहें निष्पक्ष जांच पर……
करीब 1.98 करोड़ रुपये की निविदाओं, SAP सिस्टम के संचालन, निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता, कथित दबाव और स्थानांतरण से जुड़े आरोपों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच कराकर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगा और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा? या फिर जांच की फाइल भी अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चली जाएगी।
नोट: खबर में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।


