रामानुजनगर, 11 अगस्त 2026 विश्व आदिवासी दिवस पखवाड़े के तहत मंगलवार को रामानुजनगर में सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग एवं आदिवासी समाज द्वारा रैली और जनसभा का आयोजन किया गया। विभिन्न मार्गों से निकली रैली स्टेडियम ग्राउंड पहुंची, जहां आदिवासी समाज के सैकड़ों युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, पदाधिकारी एवं ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान समाज की विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया।
जनसभा को संबोधित करते हुए सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग सूरजपुर के जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, जल-जंगल-जमीन, संस्कृति एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की ओर से शुभकामना संदेश नहीं आने के विषय पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से शुभकामनाएं दीं, जबकि प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी की ओर से सार्वजनिक बधाई संदेश नहीं दिया गया।

पोया ने प्रेमनगर विधानसभा क्षेत्र में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद प्रेमनगर विधानसभा सीट सामान्य सीट हो गई, जबकि इससे पहले यह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थी। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से प्रभावी पहल की आवश्यकता बताई।
उन्होंने सरगुजा संभाग में आदिवासी भूमि की खरीद-बिक्री, भूमि संरक्षण, आदिवासी महिलाओं एवं नाबालिगों से जुड़े अपराध, रोजगार के लिए युवाओं के पलायन तथा पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने जैसे मुद्दों पर प्रशासन से गंभीरता से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि कानून के समक्ष सभी को समानता मिलनी चाहिए तथा गरीब और आदिवासी पीड़ितों के मामलों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
बीपीएस पोया ने कहा कि आदिवासी समाज का युवा अब अपने संवैधानिक एवं पारंपरिक अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहा है। समाज लोकतांत्रिक तरीके से कलम और जनआंदोलन के माध्यम से अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करेगा। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा मांगने वाले समुदायों को केवल आरक्षण तक सीमित न रहकर आदिवासी संस्कृति, प्रकृति, जल-जंगल-जमीन और पारंपरिक जीवन-पद्धति के प्रति सम्मान एवं जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि ओम प्रकाश सिंह मरकाम, बलरामपुर ने समान नागरिक संहिता से संबंधित संभावित प्रक्रिया को लेकर आदिवासी समाज की चिंताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के संवैधानिक एवं पारंपरिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए ही किसी भी नई व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने आदिवासी हितों से जुड़े विषयों पर सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। पारंपरिक गीत-संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का उत्साह बढ़ाया और आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता अनुराग रक्सेल (अंबिकापुर), सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर दीपक मरकाम (वाड्रफनगर), कार्यक्रम संयोजक इंद्रजीत सिंह युवा, सोनू शाम, दीपक सोनवानी, सोखन सिंह, नरेंद्र मरकाम, अनुक, प्रमोद सिंह मरावी, युगेश सिंह टेकाम, आयुष सिंह पोर्ते, प्रतिमा सिंह पावले, रोहित सिंह टेकाम, सोनू सिंह मरावी, रामविचार नेताम, बलवत सिंह मरावी, हिरालाल सिंह करियाम, शिवप्रसाद सिंह अरमो, रामचंद्र सोरी एवं सत्या सिंह श्याम सहित युवा संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।


