चेरवा समाज का प्रदेश स्तरीय स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया
राहाडीह पाली, कोरबा | 18 अगस्त 2026
गोंडवाना शक्तिपीठ, राहाडीह पाली, कोरबा में मंगलवार को चेरवा समाज का प्रदेश स्तरीय स्थापना दिवस हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। समाज द्वारा लगातार पिछले छह वर्षों से स्थापना दिवस का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में समाज के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, कर्मचारी-अधिकारी, समाजसेवी, युवा, छात्र-छात्राएं एवं महिलाएं शामिल हुईं।
कार्यक्रम का शुभारंभ गोंडवाना शक्तिपीठ परिसर में साल वृक्ष, कर्मी एवं बांस की प्रकृति पूजा तथा बैगा के माध्यम से पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इसके पश्चात महापुरुष राजा मेदनीराय चेरो (चेरवा), संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर, महान आदिवासी क्रांतिकारी बिरसा मुंडा एवं भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले एवं चेरवा समाज के संस्थापक स्व. डा.नंदकुमार सोनपाकर जी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। अतिथियों का अक्षत-तिलक एवं पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। स्वागत गीत कुमारी साधना चेरवा ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री अंतराम तेलासी, जिला अध्यक्ष चेरवा समाज कोरबा ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री देवनारायण चेरवा, प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ ने कहा कि चेरवा समाज में जागरूकता लगातार बढ़ रही है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में समाज के लोगों का एकजुट होकर स्थापना दिवस में शामिल होना सामाजिक एकता और संगठन की मजबूती का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है। शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने तथा संगठन के माध्यम से समाज को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जन्म संस्कार, विवाह संस्कार एवं मृत्यु संस्कार सहित समाज की पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए समाज को संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सोशल एक्टिविस्ट बीपीएस पोया, जिला अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, सूरजपुर ने चेरवा समाज के प्रदेश स्तरीय स्थापना दिवस को सामाजिक एवं सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के विभिन्न समाज आज अपनी रीति-रिवाज, परंपरा, संस्कृति, बोली-भाषा और पारंपरिक पहचान को बचाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाजों का गहराई से अध्ययन करने पर उनमें कुछ महत्वपूर्ण समानताएं दिखाई देती हैं—प्रकृति एवं पर्यावरण से गहरा संबंध, सामुदायिक जीवन एवं सामूहिक निर्णय की परंपरा, अपनी भाषा-संस्कृति और परंपराओं की विशिष्ट पहचान, पारंपरिक ज्ञान एवं स्थानीय आजीविका तथा जल-जंगल-जमीन और पूर्वजों से गहरा जुड़ाव।
बीपीएस पोया ने कहा कि अलग-अलग आदिवासी समाजों के बीच एक-दूसरे के सहयोग, सम्मान और एकता की भावना मजबूत होना समय की आवश्यकता है। सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता के माध्यम से समाज अपनी पहचान और सामुदायिक शक्ति को और मजबूत कर सकता है। उन्होंने चेरवा समाज की आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि गोटूल के माध्यम से बच्चों, छात्र-छात्राओं और युवाओं को शिक्षा के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेरवा समाज के युवाओं से भी समाजहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी करने तथा नई पीढ़ी को शिक्षा और संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों की विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ सरगुजा करमा नृत्य की शानदार प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इस अवसर पर समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं एवं वरिष्ठजनों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक संरक्षण और युवा सहभागिता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में कोरबा चेरवा समाज जिला इकाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर संरक्षक रामकुमार बंछोर, टेकचंद रक्सेल, कृष्ण नारायण प्रताप चेरवा,प्रदेश प्रवक्ता विश्वनाथराम बड़ोंरिहा, पुष्पा सरजाल, प्रदेश उपाध्यक्ष लालबहादुर, प्रदेश सचिव लाल साय नागवंशी, प्रदेश महासचिव सुखसागर चेरवा, विष्णुकुमार बैगा, सुरेंद्र सिंह सोनवानी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनीता चेरवा, देवंती कन्हैया ,बसंत लाल मुख्य बईगा (बाबा बच्छराज कुंवर),राजकुमार बंछोर, विजय रक्सेल ,कमलकांत चेरवा,राजू नवडीहा,हेमंत बईगा तथा प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष छत्तीसगढ़ मोहनराम सोनपाकर सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में रायगढ़, बलरामपुर, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, एमसीबी, बिलासपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों एवं ब्लॉकों से समाज के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, कर्मचारी-अधिकारी, समाजसेवी, युवा, छात्र-छात्राएं एवं महिलाएं हजारों की संख्या में शामिल हुईं।


