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CGN 24 > छत्तीसगढ़ > अनुपम वस्त्रालय प्रकरण: पीड़िता के चरित्र हनन और जातिगत टिप्पणी के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज का हल्लाबोल, निष्पक्ष जांच व CAIT उपाध्यक्ष रवीन्द्र तिवारी पर FIR की मांग
छत्तीसगढ़सरगुजा संभाग

अनुपम वस्त्रालय प्रकरण: पीड़िता के चरित्र हनन और जातिगत टिप्पणी के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज का हल्लाबोल, निष्पक्ष जांच व CAIT उपाध्यक्ष रवीन्द्र तिवारी पर FIR की मांग

Last updated: September 17, 2026 1:38 pm
Surya Narayan
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अंबिकापुर:–अनुपम वस्त्रालय मामले में यौन दुर्व्यवहार की शिकार पीड़ित आदिवासी महिला को न्याय दिलाने और उसके खिलाफ की जा रही बयानबाजी को लेकर सर्व आदिवासी समाज (महिला प्रकोष्ठ) ने कड़ा रुख अपनाया है। महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष सुनीता सोनहा द्वारा थाना प्रभारी (आ०जा०क०, अंबिकापुर) को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं SC/ST Atrocity Act के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

घटना का विवरण एवं पुलिस विवेचना पर सवाल……

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 11 अगस्त 2026 को अंबिकापुर के स्कूल रोड स्थित अनुपम वस्त्रालय में एक आदिवासी महिला के साथ दुकान संचालक द्वारा कथित यौन दुर्व्यवहार की घटना हुई थी। इस संबंध में थाना सिटी कोतवाली, अंबिकापुर में धारा 74 एवं 351(3) BNS (अपराध क्रमांक 0563/2026) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

प्रारंभिक विवेचना प्रधान आरक्षक राजेश चतुर्वेदी द्वारा की जा रही थी, लेकिन आरोपी का सही नाम छिपाने, पीड़िता के पूरे बयान को एफआईआर/विवेचना में शामिल न करने और बयानों को प्रभावित करने के आरोप लगे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने प्राथमिक विवेचक को निलंबित कर दिया। हालांकि, समाज का कहना है कि अब तक पीड़िता के पूरक/पुनः कथन को विधिवत दर्ज नहीं किया गया है और उचित धाराओं का समावेश नहीं हुआ है।


CAIT उपाध्यक्ष रवीन्द्र तिवारी पर चरित्र हनन का आरोप…….

सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि CAIT सरगुजा से जुड़े रवीन्द्र तिवारी एवं उनके साथियों द्वारा पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर केस बंद कराने (खात्मा) का दबाव बनाया जा रहा है। सार्वजनिक रूप से पीड़िता पर यह झूठा आरोप लगाया गया कि उसने “शंकरगढ़ थाने में पूर्व में भी ऐसा कृत्य किया है” और जनजाति समुदाय के लिए टिप्पणी की गई कि वे “आर्थिक लाभ/राशि के लालच में Atrocity Act का दुरुपयोग करते हैं।” समाज ने इसे पीड़िता का चरित्र हनन और पूरे आदिवासी समुदाय को अपमानित करने का सुनियोजित प्रयास करार दिया है।

ज्ञापन के माध्यम से प्रमुख मांगें…….

शंकरगढ़ रिकॉर्ड की सत्यापन: शंकरगढ़ थाने से आधिकारिक सत्यापन किया जाए कि क्या पीड़िता के विरुद्ध ऐसा कोई पूर्व रिकॉर्ड दर्ज है। झूठा दावा पाए जाने पर प्रसारित करने वाले के खिलाफ कार्रवाई हो।

इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल साक्ष्य जब्ती…..

रवीन्द्र तिवारी के बयान के मूल वीडियो, ऑडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, डिजिटल साक्ष्य एवं उनके मेटाडेटा को सुरक्षित कर जांच की जाए  SC/ST Atrocity Act में केस दर्ज: जनजाति समुदाय पर सार्वजनिक रूप से अपमानजनक और जातिगत टिप्पणी करने के आरोप में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत मामला दर्ज हो।
पूरक कथन व सुसंगत धाराएं: धारा 0563/2026 के तहत पीड़िता का पूरक कथन दर्ज किया जाए, केस डायरी सुधारकर सुसंगत धाराएं जोड़ी जाएं और निष्पक्ष जांच कर वास्तविक आरोपी की सही पहचान सुनिश्चित की जाए।

गवाहों व पीड़िता की सुरक्षा: पीड़िता या गवाहों पर दबाव बनाने या अवैध हस्तक्षेप करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका तय कर वैधानिक कार्रवाई की जाए त्वरित गिरफ्तारी: अपराध की प्रकृति को देखते हुए वास्तविक आरोपी को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।

आंदोलन की चेतावनी……

सर्व आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि मामले में पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज अपने संवैधानिक व लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए शासन-प्रशासन के समक्ष “शांतिपूर्ण हुंकार रैली” का आयोजन करेगा।

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