स्कूल से गायब, जमीन के सौदों में व्यस्त! 40 एकड़ संपत्ति, गरीबों का राशन कार्ड और करोड़ों के खेल का आरोप, शिक्षक पर उठे गंभीर सवाल।
सूरजपुर:– शिक्षा विभाग में पदस्थ एक शिक्षक पर लगे गंभीर आरोपों ने जिले में हलचल मचा दी है। ओड़गी विकासखंड अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोल्हुआ में पदस्थ शिक्षक एवं प्रभारी प्रधान पाठक पवन कुमार जायसवाल के खिलाफ कलेक्टर के जनदर्शन में की गई शिकायत ने शिक्षा, राजस्व और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिक्षक शासकीय दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय निजी व्यवसाय, जमीन की खरीद-बिक्री और अन्य व्यक्तिगत कार्यों में अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि विद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ाने की अपेक्षा शिक्षक अक्सर तहसील कार्यालय, पटवारी हल्का और धान खरीदी केंद्रों में सक्रिय दिखाई देते हैं।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, स्कूल समय में निजी काम करने का आरोप
शिकायत के अनुसार, शिक्षक द्वारा स्कूल समय का उपयोग निजी कार्यों के लिए किए जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आरोप है कि शिक्षक अक्सर विद्यालय से अनुपस्थित रहते हैं या शासकीय समय में राजस्व संबंधी मामलों और जमीन के लेन-देन में व्यस्त पाए जाते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।
शिक्षक बनने से पहले नहीं थी जमीन, अब 40 एकड़ संपत्ति का दावा

मामले का सबसे चर्चित पहलू संपत्ति से जुड़ा हुआ है। शिकायत में कहा गया है कि शिक्षक बनने से पहले शिक्षक, उनकी पत्नी अथवा परिवार के नाम पर कोई उल्लेखनीय कृषि भूमि नहीं थी। लेकिन वर्तमान ऑनलाइन राजस्व अभिलेखों में उनके और परिवार के नाम पर लगभग 40 एकड़ भूमि दर्ज होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि शिक्षक की नियुक्ति से लेकर वर्तमान तक की संपत्ति, आय के स्रोत और जमीन क्रय-विक्रय का विस्तृत वित्तीय परीक्षण कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी संपत्ति किन स्रोतों से अर्जित की गई।
करोड़ों की जमीन, फिर भी गरीबों का राशन कार्ड?
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि शिक्षक की पत्नी मीना कुमारी के नाम पर प्राथमिकता श्रेणी का राशन कार्ड जारी है। जबकि परिवार के पास कथित रूप से बड़ी मात्रा में कृषि भूमि और पर्याप्त आर्थिक संसाधन मौजूद हैं।
यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह मामला पात्रता छिपाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और गरीब परिवारों के अधिकारों पर अतिक्रमण करने से जुड़ा माना जा सकता है। शिकायतकर्ता ने खाद्य विभाग से भी राशन कार्ड की पात्रता की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

पहले भी हुई शिकायत, 11 बिंदुओं पर जांच दल गठित
जानकारी के अनुसार, शिक्षक के खिलाफ इससे पहले भी विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में कुल 11 बिंदुओं पर जांच की मांग की गई थी। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर द्वारा 15 मई 2026 को जांच दल गठित कर मामले की जांच प्रारंभ कराई गई।
अब शिकायतकर्ता ने जनदर्शन टोकन क्रमांक 2250326001183 के माध्यम से कलेक्टर से पुनः हस्तक्षेप कर निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों की नजर अब प्रशासनिक जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ राजस्व, खाद्य और अन्य संबंधित विभागों द्वारा भी कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच के बाद ही सामने आएगा।


