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CGN 24 > छत्तीसगढ़ > जनजातीय गौरव दिवस 2025ः सरगुजा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोलीं- आदिवासी संस्कृति को जीवित रखना बहुत जरूरी।
छत्तीसगढ़सरगुजा संभाग

जनजातीय गौरव दिवस 2025ः सरगुजा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोलीं- आदिवासी संस्कृति को जीवित रखना बहुत जरूरी।

Last updated: November 20, 2025 1:15 pm
Surya Narayan
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अंबिकापुर 20 नवम्बर 2025/छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला के अंबिकापुर पीजी कॉलेज ग्राउंड में जनजातीय गौरव दिवस समारोह में गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शामिल हुईं। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति को जीवित रखना बहुत जरूरी है। छत्तीसगढ़ के जनजाति समाज के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा को बनाए रखे हुए हैं, इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देती हूं। मैं भी जनजाति समाज की बेटी हूं और जनजाति परिवार में जन्म लेने पर मुझे बहुत गर्व है। जनजाति समाज की परंपरा को मैं पहले भी जीती थी और अब भी जीती हूं। शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, जंगल और जमीन के साथ आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है। साथ ही बोलीं, केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों से वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन सुनिश्चित होगा।


राष्ट्रपति ने कहा कि जनजाति समाज का इस देश में बहुत बड़ा योगदान है। आदिवासी संस्कृति और सभ्यता को आगे बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि यह बेहद खूबसूरत और सुंदर है। ऐसे कार्यक्रमों में मैं जब जाती हूं तो जनजाति परिवार के लोगों से मुलाकात करती हूं। जनजाति महिलाओं से मुलाकात करने पर मुझे गर्व महसूस होता है। स्थानीय स्तर पर भी जनजाति समाज की संस्कृति और उनके विकास को प्राथमिकता से ध्यान देने की जरूरत है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आगे कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य 25 साल का हो गया है। छत्तीसगढ़ के रहने वाले सभी लोगों को मैं बधाई देती हूं। भगवान बिरसा मुंडा के इस कार्यक्रम में शामिल होने और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है। अंबिकापुर में व्यापक स्तर पर 15 नवंबर से लेकर 20 नवंबर तक जनजाति गौरव दिवस मनाया गया है
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लोगों में रोटी और बेटी का रिश्ता
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा एक दूसरे लगी हुई है ,छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लोगों में रोटी और बेटी का संबंध है। छत्तीसगढ़ के लोग ओडिशा में शादी करते हैं और ओडिशा वाले छत्तीसगढ़ में शादी करते हैं। ओडिशा और छत्तीसगढ़ की दोस्ती बहुत पुरानी है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जनजाति समाज की विरासत बहुत गहरी है।

राष्ट्रपति ने की मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की तारीफ
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ में जनजातीय गौरव पखवाड़ा मनाने, जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय बनाने और शासकीय योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंच से तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है, और इसकी झलक बस्तर की ‘मुरिया दरबार’ जैसी जनजातीय परंपराओं में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा की जनजातीय विरासत अत्यंत समृद्ध और आपस में जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति ने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति भवन में ‘जनजातीय दर्पण’ संग्रहालय की स्थापना की गई है, तथा वहां आदिवासी कला और संस्कृति को विशेष स्थान दिया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘आदि कर्मयोगी अभियान’, ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ तथा ‘प्रधानमंत्री जनमन अभियान’ को जनजातीय समाज के उत्थान हेतु महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ये सभी योजनाएँ देश के करोड़ों आदिवासी परिवारों को शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ्य और विकास के नए अवसर प्रदान कर रही हैं। राष्ट्रपति ने बताया कि दिल्ली में आयोजित ‘आदि कर्मयोगी’ राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के आदिवासी विकास विभाग को उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा उनकी पूरी टीम को बधाई दी।
जनजातीय पहचान सांस्कृतिक विरासत और वीर पूर्वजों को याद करने का दिनः राज्यपाल श्री डेका
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रामेन डेका ने जनजातीय गौरव दिवस के इस समारोह में कहा कि यह दिवस केवल उत्सव का  अवसर नहीं, बल्कि अपनी पहचान, सांस्कृतिक विरासत और उन वीर पूर्वजों को स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने जनजातीय इतिहास को गौरवशाली अध्यायों से भर दिया। राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति के बीच उपस्थित होना उनके लिए अत्यंत हर्ष और सम्मान का विषय है। समारोह में उपस्थित देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का सम्मान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि एक साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्र के सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुँचने की उनकी प्रेरक यात्रा पूरे भारत के लिए उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय स्वयं जनजातीय समाज की गोद में पले-बढ़े हैं, और उनकी जीवन-यात्रा बताती है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी दुनिया में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने उनके व्यक्तित्व और संघर्ष के कई प्रेरक प्रसंगों को याद किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने नशाखोरी, अन्याय और अंधविश्वास के खिलाफ साहसिक अभियान चलाया। उनके नेतृत्व में हुआ ‘उलगुलान’- जिसका अर्थ है ‘महान उथल-पुथल, ब्रिटिश शासन को चुनौती देने वाला ऐतिहासिक आंदोलन था, जिसने जनजातीय स्वाभिमान और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ की जनजातीय वीर गाथाओं का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, राजा गेंद सिंह, कंगला मांझी, वीर सीताराम कंवर और गुंडा धुर जैसे महानायकों ने अपने बलिदान और संघर्ष से स्वतंत्रता आंदोलन और जनजातीय गौरव को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। उनका योगदान प्रदेश की स्मृतियों में सदा अमर रहेगा।
ममतामयी राष्ट्रपति की छत्तीसगढ़ पर विशेष कृपारू मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि राष्ट्रपति महोदया ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद इस समारोह में शामिल होकर प्रदेश की गरिमा बढ़ाई है। कुछ दिन पूर्व नक्सल पीड़ित परिवारों से राष्ट्रपति महोदया की भेंट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रत्येक पीड़ित से आत्मीयता से हाल-चाल जानकर अपनी ममतामयी छवि प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की छत्तीसगढ़ पर विशेष कृपा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का इतिहास अत्यंत समृद्ध है और यहाँ के आदिवासी समाज ने देश की स्वतंत्रता में अमूल्य योगदान दिया है। हाल ही में 1 नवम्बर को आयोजित रजत महोत्सव में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने आजादी की लड़ाई से जुड़े आदिवासी महापुरुषों पर आधारित म्यूज़ियम का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि जनजातीय विद्रोह के नायकों की स्मृति को सहेजने हेतु शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-संग्रहालय का निर्माण किया गया है, जिसे राज्य स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री द्वारा जनता को समर्पित किया गया। यह देश का पहला जनजातीय संग्रहालय है, जिसमें डिजिटल माध्यम से जनजातीय गौरवगाथा को देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति महोदया के करकमलों से आज जनजातीय विद्रोह के नायकों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारजनों का सम्मान होना सभी के लिए गौरव का विषय है। साथ ही जनजाति एवं उप-जनजाति प्रमुखों को भी सम्मानित किया गया, जो अपने ज्ञान और अनुभव से समाज को निरंतर जागरूक कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत प्रदेश के 53 विकासखंडों की 2,365 बसाहटों में तीव्र गति से विकास कार्य हो रहे हैं, जिसके लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रपति महोदया द्वारा पुरस्कृत किया गया है। इसी प्रकार, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत राज्य के 32 जिलों के 6,691 गांवों में विकास के कार्यों का लाभ दिया जा रहा है। इस योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए भी छत्तीसगढ़ को राष्ट्रपति महोदया द्वारा सम्मान प्राप्त हुआ है। जनजातीय समाज के आजीविका से वनोपज का महत्वपूर्ण आधार होने की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हितों की के विषय मे बताते हुए कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की संग्रहण राशि 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है तथा चरण पादुका वितरण पुनः प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है, और मार्च 2026 तक इसके समूल नष्ट होने के लक्ष्य की ओर प्रदेश तेजी से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के चलते नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का उजाला पहुँचा है। आकर्षक पुनर्वास नीति के कारण कई भटके हुए लोग मुख्यधारा से जुड़कर सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है और सरकार की विभिन्न योजनाओं से जनजातीय समाज निरंतर लाभान्वित हो रहा है।

केंद्रीय राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उईके ने सभी को जनजातीय गौरव दिवस की बधाई दी । उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल झारखंड या जनजाति समाज के नायक ही नहीं थे बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए स्वाभिमान, सम्मान, गौरव, गरिमा और सामाजिक न्याय के प्रतीक थे। भगवान बिरसा मुंडा जी ने अपने जीवन का हर क्षण जनहित और स्वतंत्रता के संघर्ष के लिए समर्पित किया। उन्होंने अपने समाज को संगठित किया, उन्हें आत्मसम्मान और स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक योद्धा नहीं बल्कि एक सामाजिक सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु भी थे। उन्होंने समाज को नशा, अंधविश्वास और आपसी भेदभाव से मुक्त करने का आव्हान किया था। भगवान बिरसा मुंडा का  जीवन यह सिखाता है कि कोई भी व्यक्ति चाहे उसका जन्म किसी भी समाज में हुआ हो अगर उसके भीतर सच्ची लगन और आत्मबोध है तो वह इतिहास बदल सकता है।
  श्री उईके ने कहा कि बिरसा मुंडा जी ने हमें सिखाया कि विकास का अर्थ केवल भौतिक प्रगति नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान और आत्मसम्मान की रक्षा भी है। आजादी के अमृत काल में देश भर के जनजाति समाज के महानायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, महापुरुषों को चिन्हित करके उन्हें इतिहास में उचित स्थान दिया जा रहा है। जनजाति समाज के महापुरुषों के जन्म स्थलों पर स्मारक बनाए जा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां को गौरव का अनुभव हो सके। इसके साथ ही जनजाति समाज के लोग के पूजा स्थलों को चयनित कर उनका पुनरुत्थान किया जा रहा है, धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत जनजातीय बाहुल्य गांव का विकास किया जा रहा है।
  जनजातीय समाज के गौरवपूर्ण इतिहास को स्मरण करना, उसे सुरक्षित रखना और भविष्य की दिशा को प्रेरित करना मुख्य उद्देश्यः मंत्री श्री राम विचार नेताम
आदिम जाति विकास विभाग मंत्री श्री राम विचार नेताम ने अपने स्वागत उद्बोधन  कहा कि आज सरगुजा क्षेत्र और देश का समस्त जनजातीय समाज स्वयं को विशेष रूप से गौरवान्वित महसूस कर रहा है कि राष्ट्रपति महोदया ने अपने आगमन से जनजातीय समाज तथा प्रदेशवासियों के सम्मान में वृद्धि की है। उन्होंने स्मरण कराया कि 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर पूरे देश और प्रदेश में जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। उसी परिप्रेक्ष्य में आज का यह भव्य आयोजन संपन्न हो रहा है, जिसकी गरिमा राष्ट्रपति महोदया की उपस्थिति से कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों और प्रेरणा से भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती से जनजातीय गौरव दिवस की परंपरा प्रारंभ हुई, और आज उनकी 151वीं जयंती पर देशभर के जनजातीय समाज का पुनः एकत्रित होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जनजातीय समाज के गौरवपूर्ण इतिहास को स्मरण करना, उसे सुरक्षित रखना और भविष्य की दिशा को प्रेरित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। श्री नेताम ने  कहा कि “मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विशेष पिछड़ी जनजातीय वर्ग के लिए आवास, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने हेतु अभूतपूर्व योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। भारत सरकार के सहयोग से इन वर्गों का समग्र विकास तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।
समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने शहीद वीर नारायण सिंह लोक कला महोत्सव नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले लिंगो गोटूल मांदरी नाचा पार्टी कोंडागांव एवं उत्तर छत्तीसगढ़ जनजातीय लोक कला महोत्सव (करम महोत्सव) प्रतियोगिता में  प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले जय माता दी करमा नृत्य पार्टी कांसाबेल के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रपति को भगवान बिरसा मुंडा के साहस को प्रदर्शित और राज्यपाल ने भित्ती चित्रकला से जुड़े स्मृति चिन्ह भेंट किए।
कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री जिला सरगुजा एवं वित्त वाणिज्यिक कर विभाग मंत्री श्री ओमप्रकाश चौधरी, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन परिवहन सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास समाज कल्याण विभाग मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा सांसद श्री चिंतामणी महाराज, लुंड्रा विधायक श्री प्रमोद मिंज, सीतापुर विधायक श्री रामकुमार टोप्पो, प्रेमनगर विधायक श्री भूलन सिंह मरावी, प्रतापपुर विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते, सामरी विधायक श्री उद्धेश्वरी पैकरा, जशपुर विधायक श्री रायमुनी भगत, पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, भरतपुर सोनहत विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, उत्तर रायपुर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, महापौर अम्बिकापुर श्रीमती मंजुषा भगत भी उपस्थित रहे।

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