सूरजपुर:– जिले के बलरामपुर फॉरेस्ट रेंज में हुई बाघ की संदिग्ध मौत का वन विभाग ने बड़ा खुलासा करते हुए इसे शिकारी गतिविधि का परिणाम बताया है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि बाघ की मौत करंट लगने से हुई, जिसे जंगली सूअर के शिकार के लिए जंगल में बिछाया गया था। इस मामले में एक महिला सरपंच सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही सूरजपुर वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। डीएफओ डी.पी. साहू स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और टीम के साथ सूक्ष्म निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में ही यह संदेह गहराने लगा कि बाघ की मौत प्राकृतिक नहीं बल्कि मानवजनित अपराध का नतीजा है। जांच में पुष्टि हुई कि जंगल में अवैध रूप से बिजली का करंट फैलाया गया था, जिसकी चपेट में आकर बाघ की मौत हो गई।
डॉग स्क्वॉड से खुली साजिश की परतें।
बाघ की मौत के बाद आरोपियों की धरपकड़ के लिए वन विभाग ने 6 सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की। जांच में डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई। खोजी कुत्ता घटनास्थल से सूंघते हुए सीधे एक महिला सरपंच के घर पहुंचा और वहां जोर-जोर से भौंकने लगा। इसके बाद वन विभाग और जांच दल ने घर की तलाशी ली, जहां से बाघ के नाखून और बाल बरामद किए गए।
महिला सरपंच की निशानदेही पर चार और आरोपी गिरफ्तार
कड़ाई से पूछताछ करने पर महिला सरपंच ने इस वारदात में शामिल चार अन्य लोगों के नाम उजागर किए। इसके बाद टीम ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने बाघ के नाखून और बाल ऊंचे दामों पर बेचने की नीयत से काटे थे, लेकिन इससे पहले ही वे कानून के शिकंजे में आ गए।
जंगली सूअर के शिकार की आड़ में बाघ बना शिकार
वन विभाग के अनुसार, आरोपियों ने जंगल में जंगली सूअर के शिकार के लिए करंट फैलाया था, लेकिन दुर्भाग्यवश उसी दिन बाघ उस क्षेत्र में पहुंच गया और करंट की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई। दिन के समय मौके पर पहुंचने पर आरोपियों ने बाघ को मृत पाया और उसके नाखून व बाल काटकर ले गए।



वन विभाग का सख्त संदेश
वन विभाग ने इस मामले को गंभीर वन्यजीव अपराध बताते हुए कहा है कि जंगली जीवों के शिकार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। विभाग ने ग्रामीणों और वन क्षेत्रों से जुड़े लोगों को चेतावनी दी है कि वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह मामला न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शिकारी चाहे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, कानून से बच नहीं सकते।


