नई दिल्ली (RBI New Rules)भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंक खातों, लॉकर और सेफ कस्टडी से जुड़ी नामांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम 1 नवंबर 2025 से पूरे देश में लागू होंगे। अब किसी भी खाताधारक को अपने खाते या लॉकर में चार तक नामांकित व्यक्ति (Nominee) जोड़ने की सुविधा मिलेगी। इस कदम से भविष्य में उत्तराधिकार विवादों को सुलझाने में आसानी होगी और बैंकिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
अब एक खाते में चार नामांकन की सुविधा।
RBI के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब ग्राहक अपने सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, लॉकर या सेफ कस्टडी सर्विस के लिए अधिकतम चार लोगों को नामांकित कर सकेंगे।
साथ ही, खाताधारक को यह तय करने का भी अधिकार होगा कि किसी आकस्मिक स्थिति में किस नामांकित व्यक्ति को पहले दावा करने का अधिकार होगा यानी “Order of Succession” अब ग्राहक खुद निर्धारित कर सकेंगे।
नामांकन प्रक्रिया अब होगी पूरी तरह डिजिटल
RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि नामांकन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाए।
अब ग्राहक अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप या इंटरनेट बैंकिंग पोर्टल के माध्यम से ही नामांकित व्यक्ति को जोड़ने, बदलने या हटाने की प्रक्रिया कर सकेंगे।
इससे जहां एक ओर कागजी प्रक्रिया खत्म होगी, वहीं ग्राहकों का समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
पुराने नामांकन रहेंगे मान्य
RBI ने स्पष्ट किया है कि पहले से जो खाते या लॉकर किसी नामांकित व्यक्ति के नाम हैं, वे जैसे के तैसे मान्य रहेंगे।
यदि ग्राहक चाहें तो वे मौजूदा नामांकन में बदलाव कर सकते हैं या नए नाम जोड़ सकते हैं — लेकिन किसी भी बदलाव पर बैंक को ग्राहकों को SMS या ईमेल के जरिए तुरंत सूचित करना होगा।
बैंकों को रखना होगा डिजिटल रिकॉर्ड
सभी बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे ग्राहकों के नामांकन से जुड़ी जानकारी का अपडेटेड डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
कोई भी बदलाव दर्ज होने पर उसका डिजिटल ट्रेल (record log) बनाए रखना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में रिकॉर्ड को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

बदलाव का उद्देश्य और फायदा
RBI का यह कदम ग्राहक हितों की सुरक्षा, उत्तराधिकार विवादों की रोकथाम और बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इन नए नियमों से खाताधारकों के परिवारों को मृत्यु या विवाद की स्थिति में बैंकिंग दावे (Claim Settlement) में तेजी मिलेगी और कानूनी जटिलताएं कम होंगी।
RBI का कहना है “यह कदम ग्राहक सेवा में सुधार और बैंकिंग प्रणाली को और अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित होगा।”


