सूरजपुर/ओड़गी
वनांचल क्षेत्र चांदनी–बिहारपुर में वर्षों से चली आ रही बिजली संकट के खिलाफ ग्रामीणों का सब्र टूट चुका है। विद्युत सुविधा की मांग को लेकर तहसील ग्राउंड में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी पूरी मजबूती से जारी है। कड़ाके की ठंड और भूख हड़ताल के चलते सरपंच संघ अध्यक्ष सहित तीन आंदोलनकारियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिनमें अध्यक्ष की हालत गंभीर बताई जा रही है। तीनों को तत्काल बिहारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने ठंड और लगातार उपवास को स्वास्थ्य बिगड़ने की वजह बताया है।
15 दिसंबर से जारी आंदोलन, 16 से अधिक गांव आज भी अंधेरे में
चांदनी–बिहारपुर तहसील अंतर्गत 16 से अधिक गांव आज भी स्थायी बिजली आपूर्ति से वंचित हैं। प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज सरपंच संघ, समाजसेवी संगठन और सैकड़ों ग्रामीण 15 दिसंबर से धरने पर बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आधुनिक युग में भी उन्हें सोलर लाइट, लालटेन और मोमबत्ती के सहारे रात गुजारनी पड़ रही है।
बच्चों की पढ़ाई ठप, इलाज भी बना चुनौती।
धरनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों की पीड़ा हर शब्द में छलक रही है। एक ग्रामीण ने कहा,
“बिजली के बिना बच्चों की पढ़ाई रुक गई है, बीमार पड़ने पर इलाज कराना भी मुश्किल हो गया है। अंधेरा अब सिर्फ समस्या नहीं, हमारी रोजमर्रा की जंग बन गया है।”
बार-बार गुहार, फिर भी नहीं टूटी प्रशासन की चुप्पी।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को लिखित व मौखिक शिकायतें दी गईं, मगर हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। मजबूर होकर ग्रामीणों को सड़क पर उतरना पड़ा। ठंडी हवाओं के बीच नारों से गूंजता धरनास्थल प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े कर रहा है।

बिजली नहीं तो आंदोलन नहीं रुकेगा
एक महिला कार्यकर्ता ने दो टूक कहा,
“जब तक गांवों में रोशनी नहीं आएगी, तब तक यह धरना खत्म नहीं होगा, चाहे जान पर ही क्यों न बन जाए।”
प्रशासन की परीक्षा की घड़ी
धरने के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने की घटनाओं के बाद अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन अब भी मौन रहेगा या हालात बिगड़ने से पहले कोई ठोस कदम उठाएगा? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली की व्यवस्था नहीं की गई, तो आंदोलन और व्यापक व उग्र रूप ले सकता है।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं क्या यह संघर्ष अंधेरे को चीरकर रोशनी लाएगा, या फिर वनांचल की रातें और लंबी होंगी?


