सूरजपुर/विशेष रिपोर्ट
जिले में लोक निर्माण विभाग (भवन एवं संचार) संभाग सूरजपुर द्वारा किए जा रहे बीटी पैच रिपेयर कार्यों को लेकर अब जनता के बीच नाराजगी और सवाल दोनों तेज़ हो गए हैं।करीब 699.53 लाख रुपये की राशि से 260.55 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत के लिए स्वीकृत यह योजना फिलहाल विवादों के घेरे में है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि मौके पर न तो इंजीनियर मौजूद रहते हैं, न ही एसडीओ निरीक्षण के लिए पहुंचते हैं, जिसके कारण मरम्मत कार्यों में भारी लापरवाही और घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है। कई स्थानों पर तो सड़क पर केवल ऊपर से कोलतार डालकर पुराने गड्ढों को अस्थायी रूप से ढक दिया गया है। इससे यह साफ प्रतीत होता है कि करोड़ों की योजना केवल “लिपापोती अभियान” बनकर रह गई है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, 5 नवंबर 2025 तक 10.20 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत पूरी की गई बताई जा रही है। इसमें बिशुनपुर–सूरजपुर–भैयाथान मार्ग (3.00 किमी) सूरजपुर रिंग रोड (6.20 किमी)
कल्याणपुर–लटोरी–दतिमा–सलका मार्ग (1.00 किमी)
शामिल हैं।
लेकिन स्थानीय निरीक्षण में वास्तविक स्थिति इन दावों से मेल नहीं खाती। कई जगहों पर कार्य अधूरा पड़ा है और जहां काम हुआ है, वहां कुछ ही दिनों में पैच रिपेयर उखड़ने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर जनता के तीखे सवाल

इस मुद्दे ने सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ लिया है। “ डिस्टिक सूरजपुर” नामक फेसबुक ग्रुप में लोगों ने प्रशासन और विभाग की जवाबदेही पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
इसी बीच, अब्दुल सलाम क़ादरी नामक यूज़र ने जिम्मेदारी भरा सवाल उठाया।
“कितने किलोमीटर से कितने किलोमीटर पर बीटी पैच रिपेयरिंग हो रहा है, और क्या जो सड़क गारंटी में है, उसकी जांच हुई या नहीं हुई?”
यह टिप्पणी अब स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब विभाग करोड़ों खर्च कर रहा है, तो कार्यस्थल पर इंजीनियरों और अधिकारियों की अनुपस्थिति आखिर क्यों है?
जांच और जवाबदेही की मांग।
स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तुरंत स्वतंत्र गुणवत्ता जांच दल गठित करे, ताकि सभी मार्गों पर वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन हो सके।
साथ ही यह भी जांच हो कि क्या जिन सड़कों पर पैच रिपेयर कराया जा रहा है, वे पहले से “गारंटी पीरियड” में तो नहीं हैं। यदि ऐसा है, तो यह सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग और विभागीय मिलीभगत का मामला बनता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो यह पूरा मरम्मत कार्य योजना सिर्फ “कागज़ी मरम्मत” साबित होगी।
वहीं बात करें जिले के जिम्मेदार अधिकारी लोक निर्माण विभाग सूरजपुर के SDO राजीव वर्मा को उसकी जानकारी देने के लिए कई क्षेत्रवासी कॉल करके संपर्क करना चाहते है तो उनका कॉल तक उठना जरूरी नहीं समझते उसके बाद जब हमने भी कॉल लगा कर जानना चाहा तो गैर जिम्मेदार अधिकारी ना कॉल उठये ना ही रिटन कोई कॉल आया तो जरा सोचिए कितने सालों के बाद रोड का पिचिंग कार्य हो रहा है वह भी अगर गुणवत्ता विहीन हो तो क्या राज्य सरकार दोबारा इनको उसी कार्य के लिए क्या इनको फिर से कोई राशि देगा अब देखना होगा जिला प्रशासन ऐसे घोर निद्रा में सोए अधिकारी की शुध कैसे लेंगे।


