सूरजपुर नौकरी की चाह इंसान से क्या-क्या नहीं करवाती, लेकिन जब नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध रिज़ल्ट का सहारा लिया जाए, तो यह केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला अब सामने आया है, जिसकी पड़ताल करने CGN24 News की टीम मौके पर पहुँची।
जांच के दौरान टीम ने इंडियन पब्लिक स्कूल मानी प्रबंधन से सवाल किए, लेकिन स्पष्ट जवाब देने के बजाय प्रबंधन ने गोल-मोल बातें करते हुए एक दिन का समय मांगा और कहा कि वे जांच कर बताएंगे कि संबंधित मार्कशीट यहां से बनी है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार मामला सूरजपुर जिला में महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायिका भर्ती से जुड़ा बताया जा रहा है। खासतौर पर प्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत बोझा में निकली पोस्ट को लेकर आरोप लगे हैं कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

बताया जा रहा है कि संबंधित अभ्यर्थी ने वर्ष 2006-07 में किसी अन्य विद्यालय से पढ़ाई की थी, लेकिन बाद में वर्ष 2011-12 की 8वीं कक्षा की मार्कशीट प्रस्तुत की गई, जिसमें 92% अंक दर्शाए गए। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यह मार्कशीट आखिर कहां और किन परिस्थितियों में बनी।
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि कथित तौर पर कवलभान सिंह (सचिव) द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपने परिचितों को लाभ दिलाने की कोशिश की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

यह मामला केवल एक भर्ती या एक मार्कशीट तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है जो मेहनत और योग्यता के दम पर नौकरी पाने का सपना देखते हैं। यदि पैसों के बल पर फर्जी रिज़ल्ट बनने लगे, तो शिक्षा व्यवस्था और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।


अब योग्य अभ्यर्थियों और स्थानीय लोगों की निगाह प्रशासन पर टिकी है। वे मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर FIR दर्ज हो और यदि आरोप सही पाए जाएं तो सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोग जानना चाहते हैं क्या सच सामने आएगा या यह मामला भी समय के साथ दब जाएगा।


