अंबिकापुर:– प्रतीक्षा बस स्टैंड क्षेत्र स्थित खसरा नंबर 3714 की जमीन को लेकर सामने आई शिकायत की जांच के बाद प्रशासन ने मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जांच में जमीन के स्वामित्व, मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिसान संबंधी दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद कलेक्टर कार्यालय ने संबंधित विक्रेताओं एवं क्रेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश तहसीलदार अंबिकापुर को दिए हैं।
कलेक्टर कार्यालय से 23 सितंबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार नगर निगम क्षेत्र अंबिकापुर स्थित खसरा नंबर 3714 की जमीन का रकबा राजस्व अभिलेख में 0.231 हेक्टेयर दर्ज है। शिकायत में दावा किया गया था कि यह भूमि लंबे समय से जल क्षेत्र के रूप में उपयोग होती रही है। नगर निगम के मास्टर प्लान 2021 में भी इसे तालाबों की सूची में शामिल किए जाने का उल्लेख है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां निस्तारी, स्नान, कपड़े धोने और मवेशियों को पानी पिलाने सहित अन्य सार्वजनिक उपयोग होते रहे हैं। शिकायत में वर्ष 2002 में यहां छठ घाट बनाए जाने का भी उल्लेख किया गया।
मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर भी उठे सवाल…..
जांच के दौरान जमीन के पुराने दस्तावेजों की पड़ताल में बताया गया कि उक्त भूमि मूल रूप से जैलाल पिता बोधन, जाति गोंड़, अनुसूचित जनजाति के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार बाद में जैलाल की मृत्यु से संबंधित दस्तावेजों और वारिसान की जानकारी के आधार पर भूमि का नामांतरण कराया गया और इसके बाद जमीन का पंजीकृत विक्रय आजाद इराकी के पक्ष में किया गया।
जांच में जैलाल पिता बोधन की 23 अप्रैल 1976 की मृत्यु से संबंधित प्रमाण पत्र को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। नगर पालिक निगम अंबिकापुर की ओर से प्रशासन को दिए गए जवाब में बताया गया कि उक्त मृत्यु प्रमाण पत्र निगम के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है और न ही यह प्रमाण पत्र नगर निगम द्वारा जारी किया गया था।
पटवारी की भूमिका भी जांच के दायरे में……
जांच रिपोर्ट में पटवारी के बयान का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक पटवारी द्वारा जैलाल पिता देवाराम के वारिसों की जानकारी तैयार की गई थी, जिसका उपयोग कथित तौर पर जैलाल पिता बोधन के वारिसों के नामांतरण में किया गया।
प्रशासनिक जांच में विक्रेता चन्द्रशेखर यादव और क्रेता आजाद इराकी समेत अन्य संबंधित विक्रेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं ग्राम पंचायत अमलीभिठी के सरपंच और सचिव की भूमिका को लेकर भी जांच रिपोर्ट में सवाल दर्ज किए गए हैं।
पुलिस जांच के बाद खुलेगा पूरा मामला….
कलेक्टर कार्यालय ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर चन्द्रशेखर यादव, आजाद इराकी समेत अन्य संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने और कार्रवाई का पालन प्रतिवेदन तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
अब पुलिस जांच में दस्तावेजों की वास्तविकता, जमीन के नामांतरण और बिक्री प्रक्रिया में शामिल संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है। मामले में FIR और आगे की जांच के बाद ही कथित दस्तावेजी गड़बड़ी की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
तालाब की जमीन के दस्तावेजों में गड़बड़ी की शिकायत पर कलेक्टर सख्त, संबंधित विक्रेताओं-क्रेता पर FIR के निर्देश।
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