रामेश्वरम के अम्बेडकर भवन में आदिवासी अधिकार दिवस मनाया गया, छात्र-छात्राओं को बांटी गई शैक्षणिक सामग्री
रामानुजनगर/सूरजपुर, 13 सितंबर 2026
ग्राम पंचायत रामेश्वरम के अम्बेडकर भवन में रविवार को आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। अतिथियों का अक्षत-तिलक से स्वागत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सोशल एक्टिविस्ट एवं जिला अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग सूरजपुर बीपीएस पोया ने की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीपीएस पोया ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकार केवल कानून और कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। अधिकारों की रक्षा के लिए गांव की ग्राम सभा को मजबूत करना और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना सबसे जरूरी है।
उन्होंने कहा कि 13 सितंबर 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा (UNDRIP) को अपनाया था। यह घोषणा दुनिया के आदिवासी एवं स्वदेशी समुदायों के अधिकारों, पहचान, संस्कृति और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज है। इसके पक्ष में 143 देशों ने मतदान किया था।
बीपीएस पोया ने कहा कि आदिवासी अधिकार केवल जल, जंगल और जमीन तक सीमित नहीं हैं। भाषा, संस्कृति, परंपरा, पहचान, सामुदायिक जीवन और अपने विकास से जुड़े निर्णयों में भागीदारी भी आदिवासी अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक भूमि एवं प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकारों की रक्षा, संस्कृति एवं भाषा का संरक्षण तथा विस्थापन, शोषण और भेदभाव से सुरक्षा के लिए समाज को जागरूक और संगठित होना होगा।
पेसा और वन अधिकार कानून को समझना जरूरी…
बीपीएस पोया ने पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम, ग्राम सभा की शक्तियों और सामुदायिक वन प्रबंधन के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पेसा नियम बनाए गए हैं। अब आवश्यकता है कि अनुसूचित क्षेत्रों में इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम स्तर पर लोगों को जागरूक किया जाए।
उन्होंने कहा कि “शासन-प्रशासन से अपने अधिकार मांगने के साथ-साथ समुदाय को अपने अधिकारों और ग्राम सभा की शक्तियों को समझना होगा। जागरूक ग्राम सभा ही अपने गांव, जंगल, जमीन और सामुदायिक हितों की प्रभावी रक्षा कर सकती है।”
“एक कदम गांव की ओर, ग्राम सभा की ओर और एक कदम गोटुल शिक्षा की ओर”
बीपीएस पोया ने समाज से शिक्षा और सामुदायिक जागरूकता को अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि “हमें एक कदम गांव की ओर, ग्राम सभा की ओर और एक कदम गोटुल शिक्षा की ओर बढ़ाना है। इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। गोटुल की सामुदायिक भावना को आधुनिक शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जोड़कर गांवों में शिक्षा का मजबूत वातावरण तैयार किया जा सकता है।
शिक्षा को पहली प्राथमिकता दें : बिरसा मुंडा…
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिरसा मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज को शिक्षा को पहली प्राथमिकता देनी चाहिए। आदिवासी जननायकों ने संघर्ष किया, जिसके कारण समाज को अपने अधिकारों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता मिला। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को शिक्षित, जागरूक और सामाजिक-आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए समाज को निरंतर प्रयास करना होगा। उन्होंने समाज के हित में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
विशिष्ट अतिथि ज्योति सांगा ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा, “आधे रोटी खाएंगे, फिर भी स्कूल जाएंगे।” उन्होंने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के बेहतर भविष्य और समाज के विकास की मजबूत नींव है।
बच्चों को बांटी शैक्षणिक सामग्री……
आदिवासी अधिकार दिवस के अवसर पर छात्र-छात्राओं को पेन, चार्ट बोर्ड सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। बच्चों को नियमित पढ़ाई करने और शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में मोतीलाल उर्रे, सोनसाय मरकाम, दीपक मरावी, प्रमोद सिंह मरावी (कार्यकारिणी अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग रामानुजनगर), दिनेश सिंह उर्रे (उपाध्यक्ष, आदिवासी युवा छात्र संगठन रामानुजनगर), भगवत सिंह नेताम, बबीता, मनीषा, लक्ष्मी एवं शांति सहित गोटुल शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
ग्राम सभा और शिक्षा को मजबूत करना आदिवासी अधिकारों की रक्षा का आधार : बीपीएस पोया……
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