अंबिकापुर:– शहर में निजी स्कूलों की मनमानी, कथित कमीशनखोरी और फीस में लगातार बढ़ोतरी के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बुधवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने घंटों धरना देकर निजी स्कूल प्रबंधन पर पालकों के आर्थिक शोषण के गंभीर आरोप लगाए।
प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं का कहना था कि शहर के कई निजी स्कूल अभिभावकों को किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म केवल उन्हीं दुकानों से खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिन्हें स्कूल प्रबंधन ने तय किया है। इससे पालकों को बाजार से सस्ती सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता नहीं मिल पा रही है और बच्चों की पढ़ाई के नाम पर कथित कमीशनखोरी का खेल चल रहा है।
ABVP ने यह भी आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट नियम, पारदर्शिता और अभिभावकों की सहमति के हर वर्ष फीस में मनमानी बढ़ोतरी की जा रही है। इसका सीधा असर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके लिए बच्चों की शिक्षा का खर्च लगातार बोझिल होता जा रहा है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि मामला केवल फीस तक सीमित नहीं है, बल्कि एडमिशन, किताब, यूनिफॉर्म, एक्टिविटी और ट्रांसपोर्ट शुल्क के नाम पर पालकों की जेब पर लगातार अतिरिक्त भार डाला जा रहा है। उन्होंने इसे शिक्षा के व्यवसायीकरण का गंभीर उदाहरण बताया।
प्रदर्शन के बाद जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश झा ने ABVP प्रतिनिधियों से मुलाकात की और आश्वासन दिया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल अभिभावकों और छात्र संगठनों की निगाहें अब शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। शहर में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है कि क्या निजी स्कूलों की इस कथित मनमानी पर वास्तव में लगाम लग पाएगी।
संपादकीय बॉक्स शिक्षा सेवा या व्यापार?
निजी स्कूलों की फीस, किताब-यूनिफॉर्म और अन्य शुल्क को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य सेवा और गुणवत्ता होना चाहिए, न कि आर्थिक दबाव। ऐसे में शिक्षा विभाग की कार्रवाई इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण साबित होगी।


