छत्तीसगढ़ / बलरामपुर
दिनांक – 16 मार्च 2026
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के बगरा धान उपार्जन केंद्र से सामने आए एक मामले ने सरकारी खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोप है कि खरीदी केंद्र में स्टेक कर रखे धान के ढेरों पर पाइप से पानी डालकर उसे जानबूझकर भिगोया जा रहा था, ताकि धान का वजन बढ़ाया जा सके।
इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
पाइप से पानी डालकर धान भिगोने का आरोप
जानकारी के मुताबिक, जब राइस मिल और संग्रहण केंद्र के लिए धान उठाव करने ट्रक बगरा खरीदी केंद्र पहुंचे, तब मौके पर मौजूद लोगों ने देखा कि धान पूरी तरह भीगा हुआ है। आरोप है कि स्टेक में रखे धान पर पाइप के माध्यम से पानी डाला गया था मौके पर मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा।

एसडीएम पहुंचे मौके पर, शुरू हुई जांच
मामले की सूचना मिलते ही बलरामपुर एसडीएम आनंद नेताम मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में धान का मॉइश्चर लगभग 45 प्रतिशत पाया गया, जो सामान्य मानक से कई गुना अधिक है।
जांच के दौरान कई बोरियों में धान के साथ धूल-मिट्टी भी मिली। इतना ही नहीं, कई बोरियों में रखे धान में अंकुरण तक हो चुका था, यानी धान से पौधे निकलने लगे थे। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि धान को लंबे समय से पानी डालकर भिगोया जा रहा था।
सुबह भिगोकर ट्रकों में लोड करने का आरोप
सूत्रों का दावा है कि धान को भोर में पानी डालकर भिगोया जाता था और उसके बाद ट्रकों में लोड कर दिया जाता था। सूरज निकलने तक ऊपर का पानी सूख जाता था, जिससे पहली नजर में धान सामान्य दिखाई देता था।
बताया जा रहा है कि खरीदी केंद्र के प्रभारी से जुड़े वाहनों के माध्यम से भी धान का उठाव किया जा रहा था, जिससे पूरे मामले पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकारी व्यवस्था को नुकसान की आशंका
अगर धान को पानी डालकर वजन बढ़ाया गया है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी व्यवस्था को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला हो सकता है। साथ ही भीगा हुआ धान खराब होने पर उसकी मार अंततः आम जनता को भुगतनी पड़ सकती है, क्योंकि यही धान बाद में चावल बनकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन) के माध्यम से लोगों तक पहुंचता है।
किसानों पर बोझ, धान पर खेल!
धान खरीदी के दौरान किसानों को अक्सर नमी (मॉइश्चर) के नाम पर कटौती का सामना करना पड़ता है। वहीं अब उठाव के समय खरीदी केंद्र में धान पर पानी डालकर वजन बढ़ाने के आरोप ने व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर
फिलहाल एसडीएम द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अब देखना यह होगा कि इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होती है या फिर मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाता है।


