सूरजपुर:–शीतलहर और कड़कती ठंड के बीच जब जरूरतमंदों को सहारे की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, ऐसे समय में अलख सामाजिक गुणवत्ता मंच, विश्रामपुर ने मानवता और सामाजिक संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। मंच द्वारा पूर्व माध्यमिक शाला लक्ष्मीपुर में अध्ययनरत 57 विद्यार्थियों को स्वेटर, जूस एवं कोलगेट ब्रश का वितरण कर न केवल उन्हें ठंड से राहत दी गई, बल्कि उनके चेहरों पर मुस्कान भी लौटाई गई।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर एक उत्सवधर्मी और सकारात्मक वातावरण से भर उठा। स्वेटर प्राप्त करते ही बच्चों की आंखों में खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था। यह पहल उन बच्चों के लिए विशेष रूप से सहायक साबित हुई, जो ठंड के मौसम में संसाधनों की कमी से जूझते हैं।

इस अवसर पर मंच के कोषाध्यक्ष श्री शेष नारायण क्षत्रिय ने बच्चों को प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि “शिक्षा ही जीवन को दिशा देती है। यदि बच्चे मन लगाकर पढ़ाई करें, समय पर पौष्टिक भोजन लें और स्वच्छता का ध्यान रखें, तो सफलता निश्चित रूप से उनके कदम चूमेगी।” उन्होंने बच्चों से ईमानदारी, अनुशासन और निरंतर परिश्रम को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, अभिभावक एवं विद्यालय स्टाफ की उपस्थिति रही। ग्रामीणों ने अलख सामाजिक गुणवत्ता मंच की इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास न केवल बच्चों को ठंड से बचाते हैं, बल्कि शिक्षा के प्रति उनके आत्मविश्वास और रुचि को भी बढ़ाते हैं।
इस सराहनीय कार्यक्रम में प्रमुख रूप से
श्री राजेश कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष, अलख सामाजिक गुणवत्ता मंच, विश्रामपुर
श्री रघुवर राजवाड़े, लीगल एडवाइजर, एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर एवं सदस्य, अलख सामाजिक गुणवत्ता मंच
श्री शेष नारायण क्षत्रिय, कोषाध्यक्ष, अलख सामाजिक गुणवत्ता मंच
श्री संतोष कुमार उपाध्याय, व्याख्याता, हाई स्कूल लक्ष्मीपुर
श्री सीमांचल त्रिपाठी, प्रधान पाठक, प्रथम बस्तामुक्त विद्यालय माध्यमिक शाला रुनियाडीह
लक्ष्मीपुर संकुल प्रभारी
उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय स्टाफ एवं ग्रामीणों का सहयोग सराहनीय रहा। अलख सामाजिक गुणवत्ता मंच की यह पहल न केवल शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली है, बल्कि समाज में सहयोग, करुणा और जिम्मेदारी की भावना को भी सशक्त करती है। निश्चित ही यह प्रयास अन्य सामाजिक संगठनों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।


