सूरजपुर/प्रतापपुर
जनपद पंचायत प्रतापपुर के ग्राम पंचायत धूमाडांड में मनरेगा के तहत स्वीकृत गहरीकरण तालाब के कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मनरेगा के नियमों को दरकिनार करते हुए पंचायत के सरपंच और सचिव द्वारा मजदूरों से काम कराने के बजाय जेसीबी और ट्रैक्टर जैसी मशीनों से काम कराया जा रहा है, जिससे गांव के गरीब मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य गांव के मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें काम की तलाश में बाहर पलायन न करना पड़े। लेकिन ग्राम पंचायत धूमाडांड में इसके उलट स्थिति देखने को मिल रही है। यहां गहरीकरण तालाब का कार्य मशीनों से कराया जा रहा है, जिससे गांव के मजदूरों का हक मारा जा रहा है और उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में स्वीकृत कार्यों को मजदूरों के माध्यम से कराने के बजाय जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर तेजी से काम कराया जा रहा है। इससे मनरेगा योजना की मूल भावना पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में मनमाने ढंग से काम कराया जा रहा है और गरीब मजदूरों को काम से वंचित कर दिया गया है।
गांव के कई लोगों का कहना है कि उन्हें रोजगार नहीं मिलने के कारण मजबूरी में यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा सहित अन्य राज्यों में मजदूरी करने के लिए जाना पड़ रहा है। जबकि गांव में ही मनरेगा के तहत काम उपलब्ध होना चाहिए था।

ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मनरेगा के कार्यों में मशीनों का उपयोग कर मजदूरों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है, तो यह सीधे-सीधे केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर पलीता लगाने जैसा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत धूमाडांड में चल रहे गहरीकरण तालाब कार्य की जांच कराई जाए और यदि मशीनों से काम कराने की पुष्टि होती है तो सरपंच और सचिव के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं ग्रामीणों को मनरेगा के तहत उनका अधिकार दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।


