सूरजपुर। धान खरीदी के नए डिजिटल मॉडल ‘तुहर टोकन ऐप’ की चमकदार लॉन्चिंग के बीच किसानों की मुश्किलें पहाड़ बनकर टूट रही हैं। जिला प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्तियों में खरीदी प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और आधुनिक बताने के दावे तो खूब किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को कठघरे में खड़ा कर रही है। केंद्रों पर पहुंच रहे किसान टोकन हाथ में लिए खड़े हैं, मगर खरीदी की व्यवस्था चरमराई हुई है नतीजा, किसान बैरंग लौटने को मजबूर।खाद्य विभाग द्वारा लॉन्च किया गया यह ऐप आधार-ओटीपी के जरिए रोज सुबह 8 बजे टोकन बुकिंग की सुविधा देता है।

शासन के निर्देशानुसार सीमांत किसानों को 1, लघु किसानों को 2 और बड़े किसानों को 3 टोकन की सीमा तय की गई है। टोकन सात दिनों तक वैध बताए गए हैं और 70% खरीदी स्लॉट ऐप से आरक्षित होने की बात कही गई है। दावा था कि इससे कतारें खत्म होंगी, समय बचेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।लेकिन जमीनी सच इसके उलट है। बसदेई सहकारी समिति में टोकन नंबर TK39001501252600001 वाले किसान ने 17 नवंबर को बुकिंग की थी और 20 नवंबर को 46 क्विंटल धान लेकर केंद्र पहुंचा। लेकिन केंद्र ने साफ कह दिया—खरीदी संभव नहीं, अगली तारीख पर आएं। ऐसे कई किसान टोकन होने के बावजूद निराश लौट रहे हैं।इस अव्यवस्था की वजहें भी कम नहीं—हमाली का अभाव, तौल मशीनों की खराबी, तस्दीक प्रक्रिया में ठहराव और सबसे ऊपर कर्मचारियों की लगातार हड़ताल। खरीदी प्रभारी व ऑपरेटरों को ट्रेनिंग अधूरी दी गई, जिससे पूरी प्रणाली ‘ट्रायल और एरर’ मोड पर चल रही है। शासन की सख्ती के बावजूद कर्मचारी हड़ताल पर अड़े हैं और इसका सीधा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।सिस्टम की इस हड़बड़ाहट और तकनीकी गड़बड़ियों ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। किसान कह रहे हैं—टोकन मिला… पर धान का क्या..?यदि जल्द सुधार नहीं हुए तो धान खरीदी केंद्रों पर जमा होते धान के ढेर और किसानों का गुस्सा दोनों ही प्रशासन पर भारी पड़ सकते हैं।


