सूरजपुर/प्रतापपुर
ग्राम पंचायत गोंदा में एकाकी हाथी की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया है। रात के समय खुलेआम गांव में विचरण कर रहे हाथी ने गोंदा निवासी बृजलाल राजवाड़े का घर तोड़ दिया। इससे पहले तीन दिन पूर्व मनमोहन देवांगन और रामभरोस उर्फ चिंटू के घरों को भी हाथी ने क्षतिग्रस्त कर भारी नुकसान पहुंचाया था। हालांकि अब तक किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों का भय बढ़ता जा रहा है।
गौरतलब है कि बीते कुछ सप्ताहों में ग्राम पंचायत पौड़ी तथा धरमपुर–चिकनी क्षेत्र में भी एकाकी हाथी का आतंक सामने आ चुका है। अब वही खतरा गोंदा गांव तक पहुंच गया है। रात होते ही गांव में सन्नाटा पसर जाता है और लोग अपने-अपने घरों में दुबके रहने को मजबूर हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण खासे चिंतित हैं।

सबसे गंभीर स्थिति तब सामने आई जब गांव के जिम्मेदार नागरिक अजय साहू ने रात करीब 12 बजे ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी प्रतापपुर रेंजर उत्तम मिश्रा को फोन कर हाथी की मौजूदगी की सूचना दी। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद वन विभाग की गाड़ी करीब दो किलोमीटर दूर दूसरी दिशा में सायरन बजाती रही, लेकिन हाथी की लोकेशन पर नहीं पहुंची। आरोप यह भी है कि वाहन को उल्टी साइट में घुमाया जाता रहा, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराज़गी फैल गई।
रात में मौके पर पहुंचे वन विभाग कर्मी कुलदीप, सौंपकर, संतलाल राजवाड़े, राहुल सिंह एवं सिपाही की भूमिका को लेकर भी ग्रामीणों में असंतोष देखा गया। गांव में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गुस्सा और निराशा दोनों का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो कोई बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि ऐसी किसी भी घटना के लिए प्रतापपुर रेंजर उत्तम मिश्रा को जिम्मेदार माना जाएगा।
लगातार हो रही घटनाएं और जिम्मेदार अधिकारियों की कथित उदासीनता ने वन विभाग की तैयारियों, सतर्कता और संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। फिलहाल ग्राम पंचायत गोंदा के लोग डर के साए में जीवन जीने को मजबूर हैं और वन विभाग से स्थायी निगरानी, नियमित रात्रि गश्त, त्वरित कार्रवाई दल तथा हाथी को सुरक्षित जंगल क्षेत्र में खदेड़ने की ठोस रणनीति की मांग कर रहे हैं।


