सूरजपुर, 13 जून
सूरजपुर:– पुलिस द्वारा नवीन आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन एवं प्रभावी अनुपालन को लेकर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान डीआईजी एवं एसएसपी श्री प्रशांत कुमार ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय में विवेचना की प्रक्रिया पहले से अधिक तकनीकी और संवेदनशील हो गई है। “मजबूत और निष्पक्ष विवेचना में निश्चित ही समय लगता है, लेकिन यही प्रक्रिया अंततः पीड़ित को न्याय दिलाने में निर्णायक सिद्ध हो रही है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि अपराध की विवेचना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासन के विभिन्न विभागों की भी इसमें समान रूप से सहभागिता आवश्यक है। डिजिटल साक्ष्य, वीडियोग्राफी, वैज्ञानिक परीक्षण और कानूनी पहलुओं को समन्वयपूर्वक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना ही आज की आवश्यकता है।

सभी विभागों को प्रशिक्षण हेतु कलेक्टर का निर्देश।
इस सत्र को प्रभावी बनाने हेतु कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन ने जिले के सभी विभाग प्रमुखों और अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण में भाग लेने का निर्देश दिया था। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री संतोष महतो, मास्टर्स ट्रेनर एसडीओपी ओड़गी श्री राजेश जोशी, डीएसपी श्री रितेश चौधरी और एसआई श्री विराट विशि द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने नए कानूनों में आए बदलावों, अपराध की वैज्ञानिक विवेचना, अभियोजन प्रणाली एवं डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया।

‘‘नवजीवन’’ अभियान के तहत लिया गया संकल्प।
प्रशिक्षण सत्र के अंत में जिला पुलिस द्वारा संचालित नशा विरोधी जन-जागरूकता अभियान ‘‘नवजीवन’’ के तहत डीआईजी श्री ठाकुर ने उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा:
“छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने, समाज को नशामुक्त रखने, अपने परिवार को स्वस्थ और समृद्ध बनाए रखने तथा पर्यावरण को स्वच्छ रखने हेतु हम सभी मिलकर नशा उन्मूलन के लिए व्यक्तिगत एवं सामाजिक स्तर पर प्रयासरत रहेंगे।”
सत्र में शिक्षा, समाज कल्याण, श्रम, परियोजना, रेशम, उप पंजीयक सहित जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। पुलिस विभाग के अधिकारी एवं जवान भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

प्रशिक्षण का उद्देश्य: नवीन आपराधिक कानूनों की जानकारी देकर प्रशासन को सक्षम बनाना।
डीआईजी की टिप्पणी: “मजबूत विवेचना न्याय की गारंटी है।”
प्रशासन की भागीदारी: सभी विभाग प्रमुखों और कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति।
नवजीवन संकल्प: नशा मुक्त समाज की दिशा में पुलिस व प्रशासन की संयुक्त पहल।


