सूरजपुर
जिले की कृषि उपज मंडी सूरजपुर इन दिनों किसानों के लिए राहत नहीं बल्कि लूट का केंद्र बनती जा रही है। मंडी में नियम-कानूनों को पूरी तरह ताक पर रखकर खुलेआम अवैध वसूली और वजन में हेराफेरी की जा रही है। हालात यह हैं कि मंडी प्रशासन की मिलीभगत से किसानों को हर मोर्चे पर शोषण का शिकार होना पड़ रहा है।
मंत्री के स्पष्ट आदेशों के बावजूद मंडी समिति द्वारा प्रति बोरी निर्धारित 40 किलो 700 ग्राम की जगह जबरन 41 किलो 150 ग्राम से लेकर उससे भी अधिक धान भरवाया जा रहा है। यह सीधे तौर पर किसानों की फसल और मेहनत की चोरी है। नियमों के अनुसार धान भरने की जिम्मेदारी मंडी समिति की है, लेकिन यहां किसान खुद बोरियां भरने को मजबूर हैं, मानो सरकारी मंडी नहीं बल्कि निजी ठेकेदारी चल रही हो।

यहीं नहीं, किसानों को दी जाने वाली बोरियों के बदले भी खुलेआम नकद वसूली की जा रही है। धान की नमी जांच के लिए लगाए गए नमी मापक यंत्र भी भ्रष्टाचार का हथियार बन चुके हैं। किसानों का आरोप है कि बिना पैसे दिए न जांच होती है और पैसे देने के बाद कई बार जांच किए बिना ही धान आगे बढ़ा दिया जाता है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि पूरे खरीदी तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
किसानों की सुविधा के नाम पर बनाए गए विश्राम गृह पर ताला लटका हुआ है, जिससे मंडी प्रशासन की असली मंशा उजागर होती है। दूर-दराज से आए किसान दिन-रात खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर हैं, जबकि सुविधाएं कागजों में मौजूद हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा है, तो क्या यह पूरा खेल किसी संरक्षण में चल रहा है?
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब शिकायत मिलने पर तहसीलदार सूर्यकांत साय अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जांच कर पंचनामा तैयार किया। अब देखना यह है कि इतने स्पष्ट सबूतों के बावजूद क्या जिम्मेदारों पर बड़ी और निर्णायक कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा।
किसानों ने इस अवैध वसूली और वजन घोटाले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील की है। सवाल साफ है
क्या किसानों को न्याय मिलेगा या मंडी में लूट का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?


