नई दिल्ली/ CGN 24 विशेष रिपोर्ट।
भारत की बेटियों ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, और अब शिक्षा के क्षेत्र में एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। मध्य प्रदेश की नंदिनी अग्रवाल ने मात्र 19 साल की उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की परीक्षा उत्तीर्ण कर देश की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का गौरव हासिल किया है।
उनका यह नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है, जिससे पूरे देश में खुशी और गर्व की लहर है।
13 साल की उम्र में 10वीं और 15 में 12वीं पास
नंदिनी अग्रवाल बचपन से ही तेज़ तर्रार और मेहनती छात्रा रही हैं। उन्होंने 13 साल की उम्र में 10वीं कक्षा और 15 साल की उम्र में 12वीं कक्षा की परीक्षा पास कर ली थी। इसके बाद उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी की कठिन पढ़ाई में कदम रखा, जिसे आम तौर पर लोग 22–23 साल की उम्र में पूरा करते हैं।
लेकिन नंदिनी ने अपनी लगन, अनुशासन और निरंतर मेहनत के दम पर महज़ 19 वर्ष की आयु में CA फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR-1) हासिल कर इतिहास रच दिया।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में हुआ नाम दर्ज
नंदिनी की इस अद्भुत उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें भारत की सबसे कम उम्र की महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में दर्ज किया है।
यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है।
परिवार का साथ और भाई से मिली प्रेरणा
नंदिनी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया।
उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई साक्षात अग्रवाल, जो खुद भी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, ने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया।
दोनों भाई-बहन ने मिलकर पढ़ाई की और कठिन विषयों को समझने में एक-दूसरे की मदद की नंदिनी कहती हैं
“मेरे भाई ने हमेशा मुझे यह सिखाया कि अगर किसी काम के लिए जुनून हो, तो असंभव कुछ भी नहीं। उन्होंने मेरे लिए रोल मॉडल की तरह काम किया।”
नंदिनी की सोच “सपनों को उम्र से नहीं, मेहनत से मापा जाता है”

अपनी इस उपलब्धि पर नंदिनी ने कहा
“लोग कहते हैं कि कुछ करने के लिए उम्र का इंतजार करना चाहिए, लेकिन मैंने सीखा कि अगर आपके भीतर जुनून और मेहनत है, तो उम्र सिर्फ एक संख्या है। सपनों को उम्र से नहीं, मेहनत से मापा जाता है।”
कठिन परिश्रम और अनुशासन ने बनाया ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर’ चार्टर्ड अकाउंटेंसी को भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है।
देशभर में हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन बहुत कम ही इसे पास कर पाते हैं।
नंदिनी ने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ निश्चय और अनुशासन से कोई भी मुकाम पाया जा सकता है।
देशभर से मिल रही बधाइयाँ नंदिनी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सोशल मीडिया पर बधाइयों की बौछार हो रही है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, ICAI और कई जानी-मानी हस्तियों ने उन्हें “देश की प्रेरणा” बताया है।
लोगों ने लिखा “नंदिनी जैसी बेटियां ही भारत का भविष्य उज्जवल बना रही हैं।”
“भारत की बेटी” बनी प्रेरणा।
नंदिनी अग्रवाल की यह सफलता न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, बल्कि यह हर उस बेटी के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखती है।
उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि अगर जज़्बा और लगन हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं।


