प्रतापपुर/सूरजपुर
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर ब्लॉक में महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायिका भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्राम पंचायत बोझा में निकली एक पोस्ट के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध मार्कशीट लगाए जाने के आरोप लगे हैं। मामले के सामने आते ही शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

स्कूल का नाम चर्चा में
सूत्रों के अनुसार, जिस 92 प्रतिशत अंक वाली मार्कशीट के आधार पर नियुक्ति का दावा किया गया, वह इंडियन पब्लिक स्कूल मानी से जारी बताई गई। मीडिया द्वारा तथ्य जानने के लिए संपर्क किए जाने पर स्कूल प्रबंधन की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। पहले दस्तावेज की पुष्टि का आश्वासन दिया गया, बाद में संबंधित फोटो साझा करने से इंकार कर दिया गया।
स्कूल प्रबंधन का कहना था कि यदि जिले के जिम्मेदार अधिकारी दस्तावेज मांगेंगे तो उपलब्ध कराए जाएंगे।
खबर के बाद पलटा घटनाक्रम मामला सार्वजनिक होने के बाद संबंधित छात्रा ने महिला एवं बाल विकास विभाग में लिखित आवेदन देकर नियुक्ति से स्वयं को अलग करने की बात कही। इस घटनाक्रम ने पूरे प्रकरण को और संदेहास्पद बना दिया है।

संचालक पर पहले भी उठे हैं सवाल
मामले में स्कूल संस्थापक संजय सिंह का नाम सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, उनके द्वारा जिले में दर्जनों स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। पूर्व में भी उनसे जुड़े एक अन्य संस्थान – स्वामी विवेकानंद स्कूल विश्रामपुर – को बोर्ड परीक्षा से वंचित किए जाने की चर्चा रही है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रशासन की कार्रवाई पर निगाह
जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने मामले में जांच टीम गठित करने और तथ्यों की पुष्टि के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
क्या दस्तावेजों की तकनीकी जांच होगी?
क्या फर्जीवाड़ा सिद्ध होने पर FIR दर्ज की जाएगी?
क्या संबंधित संस्थानों के रिकॉर्ड की व्यापक जांच होगी?
मेहनती विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर..
यह मामला केवल एक भर्ती या एक मार्कशीट तक सीमित नहीं है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह उन हजारों विद्यार्थियों के साथ अन्याय होगा जो कड़ी मेहनत से परीक्षा उत्तीर्ण कर रोजगार की उम्मीद रखते हैं।

जिले में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की मांग उठ रही है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में क्या कदम उठाता है — और क्या सच पूरी तरह सामने आ पाता है।


