लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी से एक ऐसा शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के सरकारी दावों की पोल खोल दी है। 28 दिसंबर 2025 की रात, एक युवती के साथ उसके ही कमरे में घुसकर चार–पांच नकाबपोशों ने जघन्य अपराध को अंजाम दिया। पीड़िता अकेली थी, तभी दरवाज़े पर हलचल हुई। दरवाज़ा खुलते ही आरोपियों ने जबरन भीतर घुसकर उसे ज़मीन पर गिराया, आवाज़ दबाई और बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं।
पीड़िता के मुताबिक, यह हमला पुराने मुकदमे का बदला लेने और उसे केस वापस लेने के दबाव में किया गया। विरोध करने पर आरोपियों ने जान से मारने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। इस मामले में आदित्य त्रिपाठी और अमित त्रिपाठी सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब एक महिला अपने कमरे में भी सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं रह गया है..?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जहां ‘भयमुक्त उत्तर प्रदेश’, बुलडोजर कार्रवाई और सख्त कानून-व्यवस्था के दावे करती है, वहीं यह घटना प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। कुलमिलाकर प्रशासन और पुलिस से मांग है कि तत्काल एफआईआर दर्ज कर नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए, पीड़िता को सुरक्षा और न्याय दिया जाए। यह सिर्फ एक महिला की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा और न्याय की लड़ाई है। अगर आज ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कल कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।


