कुसमी बलरामपुर:– रामानुजगंज जिले में राजस्व विभाग को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा हल्का पटवारियों के बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों के बाद अब लोगों की नजरें राजस्व विभाग के उन बाबुओं (क्लर्क/कर्मचारियों) पर टिक गई हैं, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। जिले के विभिन्न इलाकों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या पटवारियों की तरह ही वर्षों से एक ही स्थान पर जमे बाबुओं का भी स्थानांतरण किया जाएगा?
दरअसल, जिले में कुल 11 तहसीलें हैं, जिनमें प्रमुख रूप से बलरामपुर, रामानुजगंज, सामरी, कुसमी, शंकरगढ़, वाड्रफनगर सहित हाल ही में घोषित चांदो, दौरा-कोचली और रघुनाथनगर जैसी तहसीलें शामिल हैं। जानकारों के अनुसार इन तहसीलों के राजस्व कार्यालयों में कई बाबू वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। लंबे समय से एक ही जगह पर जमे रहने के कारण इनके कामकाज की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कई कर्मचारी अपने गृहग्राम या आसपास के क्षेत्र में ही वर्षों से पदस्थ हैं, जिससे उनका प्रभाव इतना बढ़ गया है कि वे खुद को कर्मचारी के बजाय अधिकारी समझने लगे हैं। आरोप है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से सांठगांठ और भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिला है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को छोटे-छोटे राजस्व कार्यों के लिए भी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
भ्रष्टाचार पर लग सकता है अंकुश..
बुद्धिजीवी वर्ग और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पटवारियों की तरह राजस्व विभाग के बाबुओं का भी पारदर्शी तरीके से तबादला किया जाए तो इससे व्यवस्था में सुधार आ सकता है। कलेक्टर कार्यालय और उच्च अधिकारियों द्वारा इस विषय पर गंभीरता से मंथन कर सूची तैयार की जाए और लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाए, तो इससे राजस्व कार्यों में पारदर्शिता आएगी और लंबित मामलों के त्वरित निपटान में भी मदद मिलेगी।
लोगों का कहना है कि इस कदम से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, कार्यों में कुशलता बढ़ेगी और आम नागरिकों को राजस्व विभाग की सेवाएं बिना परेशानी के मिल सकेंगी।
फिलहाल जिले में यह चर्चा तेज है कि पटवारियों के तबादले के बाद क्या अब राजस्व विभाग के बाबुओं पर भी प्रशासनिक कार्रवाई होगी या नहीं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।


