सूरजपुर:–बिजली जैसी बुनियादी सुविधा की मांग को लेकर बिहारपुर क्षेत्र के 23 गांवों के ग्रामीण बीते आठ दिनों से कड़ाके की ठंड में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। प्रशासनिक उपेक्षा और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से आक्रोशित ग्रामीणों ने बुधवार को अपने सिर मुंडवाकर अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों ने इसे “अंधेरे से उजाले की लड़ाई” करार दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि 15 दिसंबर से चांदनी–बिहारपुर क्षेत्र में बिजली विस्तार एवं आपूर्ति की समस्या को लेकर आंदोलन जारी है, लेकिन अब तक न तो जिला प्रशासन का कोई अधिकारी और न ही कोई जनप्रतिनिधि उनकी सुध लेने धरना स्थल तक पहुंचा है। लगातार अनदेखी से ग्रामीणों का सब्र टूटता जा रहा है।
आंदोलन के दौरान स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए कथित गैर-जिम्मेदाराना बयानों ने स्थिति को और अधिक भड़का दिया है। आंदोलन से जुड़े युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

धरने के आठवें दिन विरोध का स्वर और तेज करते हुए तुलसीराम जायसवाल (उपसरपंच), गजमोचन सिंह (सरपंच संघ अध्यक्ष), जितेंद्र साकेत, लक्ष्मण जायसवाल, रामराज सिंह और भानुप्रताप खैरवार ने सार्वजनिक रूप से मुंडन कराकर प्रशासन और सरकार का ध्यान आकर्षित किया। आंदोलनकारियों ने मीडिया के माध्यम से केंद्र एवं प्रदेश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक 23 गांवों में बिजली विस्तार और नियमित आपूर्ति की ठोस व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस प्रतीकात्मक लेकिन गंभीर विरोध को सुनेगा या ग्रामीणों को यूं ही अंधेरे में जीने को मजबूर किया जाता रहेगा।


