रायपुर/छत्तीसगढ़:– में सूदखोरी, ब्लैकमेलिंग और जमीन कब्जे के मामलों में घिरे वीरेंद्र सिंह तोमर की गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति और सामाजिक माहौल में नया बवंडर खड़ा हो गया है। तोमर के समर्थन में क्षत्रिय करणी सेना खुलकर मैदान में उतर आई है। संगठन के राष्ट्रीय प्रमुख राज शेखावत ने पुलिस और मंत्रियों को खुली धमकी दी है और रायपुर में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
सूदखोर वीरेंद्र सिंह तोमर की गिरफ्तारी और जुलूस।
रायपुर पुलिस ने बीते दिनों ग्वालियर से फरार चल रहे वीरेंद्र सिंह तोमर को हिरासत में लिया था। उसके खिलाफ सूदखोरी, मारपीट, ब्लैकमेलिंग, जमीन हथियाने, हत्या के प्रयास और दुष्कर्म जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने तोमर का जुलूस उसी इलाके में निकाला था, जहां कभी उसकी दहशत मानी जाती थी।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में तोमर काली बनियान पहने, थाने के भीतर दुबका हुआ नजर आया था।
करणी सेना का वीडियो बयान “अत्याचार का जवाब देंगे”
इसी बीच करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पुलिस कार्रवाई को “अमानवीय” बताया है। शेखावत ने कहा।

“एक क्षत्रिय नेता के साथ पुलिस ने थर्ड डिग्री टॉर्चर किया, अश्लीलता की। यह अत्याचार हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। जिन अफसरों और नेताओं ने यह साजिश रची है, उन्हें जवाब मिलेगा और बहुत जल्द मिलेगा।”
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि क्षत्रिय समाज अब राजकीय और प्रशासनिक अत्याचारों का आक्रामकता से जवाब देगा, और रायपुर में विशाल आंदोलन की तारीख जल्द घोषित की जाएगी।
वीरेंद्र सिंह तोमर का करणी सेना से जुड़ाव।

वीरेंद्र सिंह तोमर करणी सेना का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष बताया जा रहा है। यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी को लेकर संगठन में उबाल देखा जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, तोमर के खिलाफ कई जिलों में आर्थिक और आपराधिक मामलों की जांच चल रही है।
पुलिस की तैयारी और प्रशासन की सतर्कता।
राज शेखावत के धमकी भरे बयान के बाद रायपुर पुलिस और प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तेज कर दी गई है, ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट या वीडियो के प्रसार पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
पृष्ठभूमि: अपराध और राजनीति का गठजोड़?
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि अपराध, जातीय संगठन और राजनीतिक हितों के गठजोड़ का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। करणी सेना के वीडियो बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या संगठन खुलेआम अपराधियों के पक्ष में खड़ा हो रहा है या फिर इसे समाज के सम्मान की लड़ाई के रूप में पेश किया जा रहा है।


