दुर्ग।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 5 अक्टूबर को प्रस्तावित पुलिस परिवार महासम्मेलन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संगठन के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने आरोप लगाया है कि दुर्ग एसपी विजय अग्रवाल, कलेक्टर अभिजीत सिंह और नगर निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल संयुक्त रूप से कार्यक्रम को रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं।
दीवान के अनुसार, सम्मेलन के आयोजन स्थल स्वामी विवेकानंद भवन के मुख्य गेट पर निगम आयुक्त के निर्देश पर ताला लगा दिया गया है, जिससे कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे पुलिस परिवार के सदस्य परेशान हैं।
11 सितंबर को हुई थी एडवांस बुकिंग।
पुलिस परिवार संगठन ने 11 सितंबर को विवेकानंद भवन की बुकिंग कर अग्रिम राशि जमा की थी। संगठन के पास इसकी आधिकारिक रसीद भी मौजूद है।
लेकिन अचानक 3 अक्टूबर को नगर निगम आयुक्त ने एसडीएम और पुलिस की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की मांग कर दी। संगठन का कहना है कि नगर निगम ने पहले कभी भी कन्फर्म बुकिंग के बाद इस तरह की मांग नहीं की।


‘शांतिपूर्ण पारिवारिक मिलन, न कोई मांग न रैली’
आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और पारिवारिक मिलन पर आधारित है। इसमें न तो ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग होगा और न ही किसी प्रकार का प्रदर्शन या मांगपत्र प्रस्तुत किया जाएगा।
“यह सिर्फ पुलिस परिवारों के आपसी संवाद और एकता का कार्यक्रम है,” अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने कहा।
महत्वपूर्ण अतिथियों को भेजे गए आमंत्रण।
इस महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, गृहमंत्री विजय शर्मा, कैबिनेट मंत्री, सांसद, विपक्षी दलों के नेता तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रण भेजा गया है। कई अतिथियों ने इसमें आने की सहमति भी दी है।



‘एसपी ने आमंत्रण पत्र लेने से इंकार किया’
उज्जवल दीवान ने आरोप लगाया कि जब वह एसपी विजय अग्रवाल को आमंत्रण देने पहुंचे, तो उन्होंने कार्ड लेने से इंकार कर दिया और कहा कि पहले अनुमति लानी होगी।
दीवान के मुताबिक, “बंद स्थान में शांतिपूर्ण कार्यक्रम के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, सिर्फ सूचना देना होता है, जो हमने पहले ही कलेक्टर और एसडीएम को दे दी थी।”
‘2018 और 2022 की तरह दोहराई जा रही कहानी’
दीवान ने चेतावनी दी कि अगर जिला प्रशासन ने सम्मेलन को रोका, तो इसका असर सरकार की छवि पर पड़ेगा। उन्होंने कहा,
“2018 और 2022 में भी पुलिस परिवार के कार्यक्रम रोके गए थे, जिसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था। अगर इस बार भी ऐसा होता है, तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।”
प्रशासन की चुप्पी
इस मामले पर दुर्ग जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और नगर निगम आयुक्त की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
लेकिन सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन ने पुलिस सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को देखते हुए एहतियाती तौर पर अनुमति प्रक्रिया की समीक्षा की है।


