देहरादून, उत्तराखंड
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां विजिलेंस टीम ने एक पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा, लेकिन आरोपी पटवारी ने खुद को बचाने के लिए जो किया, वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था।
रिश्वत लेते पकड़ा गया पटवारी।
विजिलेंस को सूचना मिली थी कि एक पटवारी आम नागरिक से भूमि संबंधित काम के एवज में रिश्वत की मांग कर रहा है। सूचना के आधार पर विजिलेंस की टीम ने मौके पर पहुंचकर जाल बिछाया और पटवारी को ₹2000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। रिश्वत की रकम चार नोटों (₹500 के चार नोट) के रूप में दी गई थी।

नोट निगल गया पटवारी।
हालांकि गिरफ्तारी के दौरान पटवारी ने जो चाल चली, उसने विजिलेंस की टीम को भी चौंका दिया। कार्रवाई की भनक लगते ही पटवारी ने तुरंत ₹500 के चारों नोट मुंह में डालकर निगल लिए, जिससे विजिलेंस के पास रिश्वत का कोई भौतिक सबूत नहीं बचा।
सबूत ढूंढने अब डॉक्टर की मदद।
नोट निगले जाने की पुष्टि के लिए विजिलेंस टीम ने आरोपी पटवारी को अस्पताल ले जाकर अल्ट्रासाउंड जांच करवाई। लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पेट में नोट का कोई अता-पता नहीं चला। अब विजिलेंस ने अगला कदम उठाते हुए एंडोस्कोपी कराने की योजना बनाई है, ताकि पाचन तंत्र के अंदर जाकर यह पुष्टि हो सके कि नोट वास्तव में निगले गए हैं या कहीं और गायब किए गए।
कई सवाल खड़े कर गई ये घटना।
इस पूरी घटना ने सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, यह मामला यह भी दर्शाता है कि भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए किस हद तक जाने को तैयार हैं कुछ सरकारी कर्मचारी।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एंडोस्कोपी में रिश्वत के नोट मिलेंगे या पटवारी की यह ‘पाचन नीति’ विजिलेंस की जांच को मात दे देगी।
यह मामला अभी जांचाधीन है और विजिलेंस विभाग ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाई जाएगी।


