भटगांव की ‘नीली झील’ ने ली एक और मासूम की जान..
सूरजपुर/भटगांव:– होली का त्योहार इस बार भटगांव के एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया। बंद पड़ी दुग्गा OCM खदान में बने खतरनाक जलभराव क्षेत्र, जिसे स्थानीय लोग ‘नीली झील’ के नाम से जानते हैं, में डूबने से 15 वर्षीय विकास ठाकुर की मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकास होली खेलने घर से निकला था। सूत्रों के मुताबिक, वह अपने चार दोस्तों के साथ दोपहर बाद करीब 4 बजे खदान क्षेत्र स्थित नीली झील में नहाने गया। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। बताया जा रहा है कि उसके साथ मौजूद अन्य किशोर घबराकर मौके से भाग गए।
जब देर शाम तक विकास घर नहीं लौटा तो परिजन चिंतित होकर भटगांव थाना पहुंचे। पुलिस ने तत्काल मोबाइल लोकेशन ट्रेस की, जिसमें अंतिम लोकेशन नीली झील क्षेत्र में पाई गई। रात में पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां किशोर के कपड़े और चप्पल बरामद हुए। प्रारंभिक रूप से डूबने की आशंका की पुष्टि हुई, लेकिन अंधेरा और गहराई अधिक होने के कारण रात्रि में रेस्क्यू कार्य रोक दिया गया।

अगले दिन सुबह सूरजपुर की DDRF टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाश अभियान शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 11:30 बजे किशोर का शव बरामद किया गया। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
पहले भी हो चुकी हैं कई मौतें स्थानीय लोगों का कहना है कि बंद पड़ी इस खदान में बने जलभराव क्षेत्र में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। बावजूद इसके, खदान क्षेत्र को पूरी तरह से सील नहीं किया गया है और न ही प्रभावी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
हर घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा रास्ता बंद कराने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
बंद पड़ी खदान तक लोगों की पहुंच अब भी कैसे बनी हुई है? खतरनाक जलभराव क्षेत्र को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया?
बार-बार हादसों के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया?
एक मासूम की मौत ने फिर प्रशासनिक लापरवाही पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आशंका है कि भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं भटगांव की यह ‘नीली झील’ अब सिर्फ एक जलभराव स्थल नहीं, बल्कि सुरक्षा इंतजामों की कमी का प्रतीक बन चुकी है। प्रशासन के सामने चुनौती है – क्या इस बार केवल संवेदना व्यक्त होगी, या वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई भी होगी?


